BRO का 'Project Arunank' हुआ 19 साल का: बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
BRO का 'Project Arunank' हुआ 19 साल का: बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव

Border Roads Organisation के 'Project Arunank' ने अरुणाचल प्रदेश में अपने 19 साल पूरे कर लिए हैं। एलएसी (LAC) के पास हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की यह रणनीति डिफेंस प्रोजेक्ट्स से जुड़ी ईपीसी (EPC) कंपनियों के लिए बड़े अवसर लेकर आई है।

बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश में सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट अरुणंक' की 19वीं सालगिरह मनाई है। निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए, यह माइलस्टोन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी बड़े सरकारी कैपिटल स्पेंडिंग का एक बड़ा संकेत है। सरकार का लक्ष्य केवल नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि ऐसी कनेक्टिविटी तैयार करना है जो हर मौसम में भारी मिलिट्री और सिविल वाहनों का भार सह सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर पर प्रभाव

278 किलोमीटर लंबी 'हापोली-सरली-हुरी रोड' जैसी परियोजनाएं डिफेंस-रिलेटेड सार्वजनिक कार्यों की जटिल इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण हैं। ईपीसी (EPC) सेक्टर की कंपनियों के लिए एलएसी के आसपास कनेक्टिविटी का विस्तार लगातार डिमांड पैदा कर रहा है। इन चुनौतीपूर्ण इलाकों में काम करने के लिए स्लोप प्रोटेक्शन और लैंडस्लाइड मैनेजमेंट जैसी विशेष विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जिससे प्रतिस्पर्धा कुछ चुनिंदा अनुभवी कंपनियों तक ही सीमित रह जाती है।

कठिन रास्तों में जोखिम

दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में सड़क निर्माण सामान्य हाईवे की तुलना में काफी महंगा और समय लेने वाला होता है। खराब मौसम, मौसमी बाढ़ और भूस्खलन जैसी भूगर्भीय समस्याओं के कारण प्रोजेक्ट्स की लागत अक्सर बजट से ऊपर चली जाती है। ऐसे में सिविल कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए मार्जिन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। जो कंपनियां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को संभालने का ट्रैक रिकॉर्ड रखती हैं, निवेशकों के बीच उनकी डिमांड ज्यादा रहती है।

डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत

बॉर्डर सिक्योरिटी के अलावा, यह इंफ्रास्ट्रक्चर सामाजिक-आर्थिक विकास का भी जरिया बन रहा है। इससे अरुणाचल प्रदेश के सुदूर इलाकों की जनता की स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजारों तक पहुंच आसान हो गई है। सरकार का इन संपत्तियों के मेंटेनेंस पर लगातार बजट आवंटन जारी रहने से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इंजीनियरिंग सर्विसेज की मांग आने वाले समय में भी मजबूती के साथ बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.