BRICS देशों के ट्रेड यूनियनों की AI पर बड़ी मांग: नौकरियों पर खतरे के खिलाफ सख्त नियम हों लागू!

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AuthorMehul Desai|Published at:
BRICS देशों के ट्रेड यूनियनों की AI पर बड़ी मांग: नौकरियों पर खतरे के खिलाफ सख्त नियम हों लागू!

हैदराबाद में BRICS देशों के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने मिलकर एक अहम आवाज उठाई है। उन्होंने सरकारों से कार्यस्थलों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि AI इंसानों की मदद के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए, ताकि कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने और गलत ऑटोमेटेड फैसलों से बचाया जा सके।

AI के बढ़ते इस्तेमाल पर Unions की चिंता

BRICS देशों के ट्रेड यूनियनों ने कार्यस्थलों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। हैदराबाद में आयोजित 15वें BRICS ट्रेड यूनियन फोरम में, प्रतिनिधियों ने तेजी से तकनीक अपनाने के जोखिमों पर प्रकाश डाला, जिसमें नौकरियों का जाना और भेदभाव शामिल है। यह फोरम BRICS श्रम और रोजगार मंत्रियों की चर्चाओं के साथ-साथ हुआ, जिसमें केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने श्रम बाजारों के भविष्य पर सत्रों की अध्यक्षता की।

इंसानों को प्राथमिकता, AI को सहायक

यूनियनों के घोषणापत्र का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक मानव-केंद्रित बनी रहे। प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई एक प्रमुख चिंता नौकरी पर रखने, प्रदर्शन प्रबंधन और नौकरी से निकालने जैसी प्रक्रियाओं में ऑटोमेटेड सिस्टम का बढ़ता उपयोग है। यूनियनों ने इन प्रक्रियाओं में अनिवार्य मानवीय निरीक्षण की वकालत की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को किसी भी ऐसे फैसले को चुनौती देने का अधिकार होना चाहिए जो केवल एक ऑटोमेटेड एल्गोरिथम द्वारा लिया गया हो। यह मांग उन कंपनियों के लिए एक वैश्विक दबाव को दर्शाती है जो अपने संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए AI उपकरणों को अपना रही हैं, ताकि औद्योगिक दक्षता और कर्मचारी अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और भविष्य की तैयारी

AI संबंधी तात्कालिक चिंताओं से परे, फोरम ने डिजिटल परिवर्तन की व्यापक चुनौतियों पर भी बात की। अपनाए गए ढांचे में BRICS देशों को री-स्किलिंग (कौशल उन्नयन) और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि कार्यबल को उन भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सके जो ऑटोमेशन से बदल सकती हैं। घोषणापत्र डेटा गोपनीयता के महत्व और तकनीकी दक्षता से होने वाले आर्थिक लाभों के उचित वितरण पर भी जोर देता है। इसका मतलब है कि ऑटोमेशन के फायदे सामाजिक असमानताओं को बढ़ाने वाले नहीं होने चाहिए।

अन्य लेबर मुद्दे और भविष्य का संकेत

इस एजेंडे में BRICS समूह के भीतर लंबे समय से चले आ रहे श्रम मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी (सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा), गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बेहतर स्थितियां, और महिला श्रम बल की भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियां शामिल हैं। हालांकि इन चर्चाओं का सीधे तौर पर किसी कंपनी के शेयर की कीमतों पर तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन ये एक ऐसे नियामक माहौल का संकेत देते हैं जो भविष्य में बहुराष्ट्रीय निगमों के अपने कार्यबल के प्रबंधन और नई तकनीक को तैनात करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। ऑटोमेशन पर बहुत अधिक निर्भर क्षेत्रों, जैसे कि IT सेवाएं, विनिर्माण और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) में निवेशक, इन क्षेत्रीय नीतिगत ढांचों को राष्ट्रीय कानूनों में बदलते हुए देख सकते हैं।

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