सरकारी तेल कंपनियों BPCL और HPCL को जून तिमाही में भारी घाटा हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में आई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण ये कंपनियां नुकसान में आ गई हैं। BPCL को **₹1,872.70 करोड़** का नेट लॉस हुआ, जबकि HPCL को **₹12,264 करोड़** का घाटा झेलना पड़ा। तेल की कीमतें **$95** प्रति बैरल के पार जाने से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।
Detailed Coverage
कच्चे तेल के बढ़ते दामों का असर
देश की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों BPCL और HPCL के लिए जून तिमाही के नतीजे काफी निराशाजनक रहे हैं। पिछले साल इसी अवधि में जहां कंपनियों ने मुनाफा कमाया था, वहीं इस बार भारी नुकसान की खबरें आई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें करीब $95.93 प्रति बैरल तक पहुँच गईं, जिसने इन कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
BPCL और HPCL के वित्तीय नतीजे
Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) ने जून तिमाही में ₹1,872.70 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹6,839.02 करोड़ का मुनाफा कमाया था। यह फाइनेंशियल ईयर 2023 की दूसरी तिमाही के बाद कंपनी का पहला तिमाही घाटा है। हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू में 23% की सालाना बढ़ोतरी हुई और यह ₹1.59 लाख करोड़ रहा।
Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) को इससे भी ज्यादा नुकसान हुआ है। कंपनी ने ₹12,264 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹4,110 करोड़ का मुनाफा था। यह फाइनेंशियल ईयर 2023 की तीसरी तिमाही के बाद HPCL का पहला तिमाही घाटा है। कंपनी की कुल आय 21% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हो गई।
सेक्टर पर दबाव और बाजार का नजरिया
तेल कंपनियों के लिए मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि वे कच्चे तेल को किस दाम पर खरीदते हैं और रिफाइंड उत्पादों को घरेलू बाजार में किस कीमत पर बेचते हैं। जब ग्लोबल कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो कंपनियों को अपने मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ता है, खासकर अगर वे बढ़ी हुई लागत पूरी तरह से ग्राहकों पर नहीं डाल पाते। इस समय मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं भी तेल की कीमतों को बढ़ा रही हैं।
अन्य कंपनियों के नतीजे
तेल क्षेत्र के अलावा, कई अन्य बड़ी कंपनियों के नतीजे भी आए हैं। IndusInd Bank का नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 71.7% बढ़कर ₹1,037 करोड़ हो गया, हालांकि नेट इंटरेस्ट इनकम में सिर्फ 1% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, Dr. Reddy’s Laboratories का नेट प्रॉफिट 68.7% घटकर ₹444 करोड़ रह गया, जबकि रेवेन्यू 5.5% गिरकर ₹8,100 करोड़ हो गया। जैसे-जैसे अर्निंग सीजन आगे बढ़ रहा है, निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनियां कैसे लागत दबाव, मांग और भविष्य के गाइडेंस को संभालती हैं।
