पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में BJP ने बड़ी जीत दर्ज की है। मई 2026 के बाद सुवेंदु अधिकारी सरकार के लिए यह पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान था, जिसमें पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है।
पश्चिम बंगाल की सियासत में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 9 अक्टूबर 2026 को घोषित नतीजों में BJP ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह जीत मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक कामयाबी मानी जा रही है।
चुनावी आंकड़े क्या कहते हैं?
नंदीग्राम सीट पर BJP की उम्मीदवार हसीरानी रथ ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। वहीं, रेजीनगर सीट पर BJP के शंकरव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के गुलाम नबी आजाद को 75,816 वोटों से हराया। ये उपचुनाव इसलिए कराए गए थे क्योंकि सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट और AJUP के संस्थापक हुमायूं कबीर ने नौदा सीट को अपने पास रखा था, जिसके बाद ये सीटें खाली हुई थीं।
पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और बिजनेस पर असर
इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स के लिए यह चुनावी स्थिरता एक पॉजिटिव संकेत है, क्योंकि किसी भी राज्य में प्रोजेक्ट्स के लिए पॉलिसी कंटिन्यूटी बहुत जरूरी होती है। नतीजों से साफ है कि BJP ने अपने आधार को उन क्षेत्रों तक भी विस्तार दिया है, जिन्हें पहले माइनॉरिटी-मेजोरिटी इलाके माना जाता था।
विपक्ष की बढ़ती मुश्किलें
इन नतीजों के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आई अंदरूनी फूट एक बड़ी वजह है। विपक्ष के अलग-अलग धड़ों में बंटे होने का सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिल रहा है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की संगठनात्मक कमजोरियां और वोट बैंक का बिखराव, राज्य में BJP के लिए एक 'स्ट्रक्चरल वैक्यूम' पैदा कर रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस जीत के बाद सरकार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और लेजिस्लेटिव एजेंडे को किस तेजी से आगे बढ़ाती है।
