प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के तौर पर बिना रुके **25 साल** का सफर पूरा कर लिया है। यह राजनीतिक मील का पत्थर भारत की आर्थिक नीतियों में निरंतरता और 'विकसित भारत 2047' के विजन को दर्शाता है, जो निवेशकों के लिए लंबी अवधि की प्लानिंग का एक बड़ा आधार है।
7 अक्टूबर, 2026 को उस ऐतिहासिक दिन के 25 साल पूरे हो गए हैं, जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। गुजरात से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का यह सफर एक रिकॉर्ड है, जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरे देश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' के जरिए मना रही है। इस दौरान देश भर में जनसेवा और विकास से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आर्थिक नीति और विजन
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह मील का पत्थर उस पॉलिसी फ्रेमवर्क को दर्शाता है, जिसने पिछले एक दशक में भारत की रफ्तार तय की है। सरकार का 'विकसित भारत 2047' का विजन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, यूपीआई (UPI) के जरिए अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने वाले पीएलआई (PLI) स्कीम पर केंद्रित है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए लंबी राजनीतिक स्थिरता का मतलब नीतियों में निरंतरता होता है। लंबे समय के लिए कैपिटल एलोकेशन उसी माहौल में बेहतर होता है, जहां सरकारी नियम और रिफॉर्म्स अनुमानित हों। जीएसटी (GST) जैसे बड़े रिफॉर्म्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस इस स्थिरता का ही नतीजा माना जाता है।
हालाँकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बीजेपी एक राजनीतिक संस्था है, कोई लिस्टेड कंपनी नहीं। इसलिए इसका कोई शेयर प्राइस या फाइनेंशियल रिजल्ट नहीं होता। निवेशकों को इस घटनाक्रम को केवल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता के नजरिए से देखना चाहिए, क्योंकि सरकारी नीतियां सीधे तौर पर कॉरपोरेट सेक्टर की परफॉर्मेंस को प्रभावित करती हैं।
