पश्चिम बंगाल के BJP MLA सुमित्रा चटर्जी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है। उनका आरोप है कि AICC मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डाली गई। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि यह सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था से जुड़ा मामला था। इस घटना ने BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के नैहाटी से BJP विधायक सुमित्रा चटर्जी ने 16 अगस्त 2026 को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। यह मांग 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुई कथित घटना के बाद उठी है। चटर्जी, जो राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज भी हैं, ने आरोप लगाया है कि समारोह के दौरान राष्ट्रगान को पूरी तरह से गाने से रोकने की बार-बार कोशिश की गई। उन्होंने इसे राष्ट्रीय धरोहर का अपमान बताया है।
BJP MLA ने जताई नाराजगी
अपने पत्र में, चटर्जी ने कहा कि इस घटना ने कई नागरिकों की भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया और 1896 के कांग्रेस सत्र से इसके प्रचलन का जिक्र किया। चटर्जी ने इस कथित रुकावट को एक बार-बार होने वाला मुद्दा बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व की ओर से राष्ट्रगान को लेकर असहजता पर निराशा व्यक्त की।
कांग्रेस का खंडन
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि इस घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी की इसमें भूमिका केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने से संबंधित थी, न कि राष्ट्रगान को रोकने से। पार्टी का कहना है कि यह व्यवस्थागत एक इशारा था और इसका अनादर करने का कोई इरादा नहीं था।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मामले ने वरिष्ठ नेताओं का भी ध्यान खींचा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस की आलोचना की और पार्टी नेतृत्व पर राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर का आरोप लगाया। इन बयानों से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं, क्योंकि दोनों पक्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह की घटनाओं पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
यह विवाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय पहचान और विरासत को लेकर चल रहे राजनीतिक मतभेदों को उजागर करता है। जैसे-जैसे यह मुद्दा सार्वजनिक डोमेन में चर्चा का विषय बना हुआ है, दोनों पक्षों के भिन्न-भिन्न बयानों पर सबकी नजरें हैं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे राष्ट्रीय समारोहों के दौरान होने वाली घटनाएं राजनीतिक बहसों का केंद्र बन सकती हैं, और अक्सर जनता व मीडिया की कड़ी scrutiny को आकर्षित करती हैं।
