Karnataka Veterinary Exam Scam: BJP ने की CBI जांच की मांग, ₹800 करोड़ के घोटाले का आरोप

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Karnataka Veterinary Exam Scam: BJP ने की CBI जांच की मांग, ₹800 करोड़ के घोटाले का आरोप

कर्नाटक में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। विपक्ष ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में कथित रिश्वतखोरी के खिलाफ CBI या न्यायिक जांच की मांग की है। आरोप हैं कि 400 से अधिक पदों के लिए बड़े पैमाने पर धांधली हुई और प्रति सीट ₹80 लाख तक मांगे गए।

Detailed Coverage

कैसे खुला भर्ती घोटाले का राज?

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) इस वक्त भारी जांच के दायरे में है। पशु चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर भर्ती को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार से आयोग की आंतरिक जांच को रद्द करने और इसकी जगह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या किसी मौजूदा हाई कोर्ट जज से जांच कराने की मांग की है।

यह पूरा मामला 342 नियमित और 58 बैकलॉग (पिछली बची हुई) रिक्तियों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप हैं कि चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया गया, जिसके चलते आयोग ने अंतिम परिणाम रोक दिए हैं। खबरें हैं कि उम्मीदवारों ने ऑडियो-वीडियो सबूत साझा किए हैं, जिनमें कथित तौर पर बिचौलिए मोटी रकम के बदले नौकरी दिलाने का वादा कर रहे थे। कुछ दावों के अनुसार, एक उम्मीदवार से ₹80 लाख तक की मांग की गई थी, और विपक्ष का अनुमान है कि इस पूरे कथित घोटाले का आंकड़ा करीब ₹800 करोड़ तक पहुंच सकता है।

KPSC की विश्वसनीयता पर सवाल?

यह मांग इसलिए उठाई गई है क्योंकि इस बात पर चिंता है कि KPSC की आंतरिक जांच से जनता का भरोसा बहाल नहीं हो पाएगा। आलोचकों का कहना है कि जब आरोपों में अधिकारियों और बाहरी दलालों की मिलीभगत का शक हो, तो आयोग खुद जांच करके जवाबदेही तय नहीं कर सकता। इस स्थिति ने उन सैकड़ों उम्मीदवारों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है जिन्होंने इन प्रतियोगी परीक्षाओं की सालों तक तैयारी की, लेकिन अब भ्रष्टाचार के संदेह के कारण प्रक्रिया अटक गई है।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर

भर्ती से जुड़े इस मामले के अलावा, यह मुद्दा कर्नाटक में राजनीतिक बहस का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी को चुनौती दी है कि वे इस स्थिति को उसी तत्परता से संभालें जैसे राष्ट्रीय स्तर की अन्य परीक्षा घोटालों को संभाला गया था। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सचमुच स्वतंत्र जांच नहीं हुई तो वे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

हितधारकों और आम जनता के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार CBI या न्यायिक जांच की मांग पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है। इन आरोपों को सुलझाने में किसी भी तरह की देरी या अगर सरकार किसी को बचाने की कोशिश करती हुई दिखी, तो KPSC की संस्थागत विश्वसनीयता को और नुकसान पहुंच सकता है। भविष्य में, हाई कोर्ट से किसी भी औपचारिक अपडेट, रोके गए चयन सूची की स्थिति और क्या सरकार राजनीतिक और सामाजिक दबाव को कम करने के लिए जांच किसी बाहरी एजेंसी को सौंपने का फैसला करती है, इस पर नजर रखी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.