BJP, Congress: अमेरिकी रिपोर्ट के बाद मचा सियासी घमासान, विदेश से साजिश का आरोप

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BJP, Congress: अमेरिकी रिपोर्ट के बाद मचा सियासी घमासान, विदेश से साजिश का आरोप

एक अमेरिकी मीडिया इन्वेस्टिगेशन ने वैश्विक विरोध-प्रदर्शनों के पीछे एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क होने का दावा किया है, जिसके बाद भारत की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। BJP ने विपक्षी दलों पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है, वहीं Congress ने इसे चुनाव आयोग की पारदर्शिता से ध्यान भटकाने की साजिश बताया है।

फॉक्स न्यूज़ डिजिटल की एक हालिया रिपोर्ट ने दुनिया के नौ देशों में अशांति फैलाने वाले एक 'रेड-ग्रीन' इकोसिस्टम का दावा किया है। इस रिपोर्ट ने भारत के सत्ताधारी दल Bharatiya Janata Party (BJP) और मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress के बीच एक नया राजनीतिक टकराव खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कम्युनिस्ट और इस्लामी समूह मिलकर लोकतांत्रिक सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

BJP का विपक्षी नेतृत्व पर हमला

रिपोर्ट के सामने आने के बाद, BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल विदेश में बैठे संगठनों के साथ मिलकर भारत में अराजकता फैलाना चाहते हैं। BJP ने विशेष रूप से 'इंडियन एलायंस पेरिस' (Indian Alliance Paris) का जिक्र करते हुए इसे विपक्ष की साजिश का हिस्सा बताया है, जिसका काम विरोध के वीडियो को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और भारत के लोकतांत्रिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना है।

कांग्रेस का पलटवार और चुनावी पारदर्शिता

Congress महासचिव जयराम रमेश ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार इन बेबुनियाद दावों के जरिए Election Commission of India से जुड़े गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। विपक्षी पार्टी पहले ही ECINET सिस्टम के जरिए चुनावी रोल पर नियंत्रण और फॉर्म भरने में आ रही प्रशासनिक बाधाओं पर सवाल उठा चुकी है, जिसे वे मतदाताओं को रोकने की रणनीति बता रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजनीतिक बयानबाजी भारतीय संसदीय माहौल का हिस्सा है। फिलहाल, यह विवाद पूरी तरह से राजनीतिक दायरे में ही सीमित है। इसका देश की फिस्कल पॉलिसी (Fiscal Policy) या कॉरपोरेट ऑपरेशंस पर कोई सीधा असर नहीं देखा गया है। निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी का विषय चुनावी और प्रशासनिक सुधारों से जुड़ी बहस है, जो आगे चलकर संसदीय सत्रों और सरकारी नीतियों की दिशा तय कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.