पंजाब में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। BJP ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी पत्नी पर रेप केस को **₹5 करोड़** में सेटल करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने भी दखल दिया है।
पंजाब की राजनीति में मचे इस घमासान की शुरुआत तब हुई जब विपक्षी दलों, खासकर BJP ने आरोप लगाया कि राज्य में एक ऐसा सिंडिकेट चल रहा है जो गंभीर आपराधिक मामलों, जिनमें रेप जैसे केस भी शामिल हैं, उन्हें ₹5 करोड़ तक की रकम लेकर सेटल या कमजोर कर रहा है।
विवाद की जड़ और खुलासे
यह विवाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह द्वारा किए गए कुछ दावों के बाद और गहरा गया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य की पुलिस और सिस्टम का इस्तेमाल रसूखदार लोगों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
NHRC का एक्शन और गवर्नेंस रिस्क
मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान (cognizance) लिया है। कमीशन ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और DGP को नोटिस भेजकर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने को कहा है। सरकार के लिए यह प्रशासनिक मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती है क्योंकि पुलिस फाइलों और केस की क्लोजर रिपोर्ट पर अब कानूनी सवाल उठेंगे।
सीएम का पक्ष और कानूनी लड़ाई
मुख्यमंत्री की पत्नी, डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से 'राजनीति से प्रेरित' बताते हुए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। डॉ. कौर ने आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उन्हें लीगल नोटिस भी भेजे गए हैं।
नागरिकों के लिए देखने वाली बात
अब सबकी नजरें NHRC को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर हैं। इस रिपोर्ट में केस फाइल्स से जुड़ी क्या जानकारी सामने आती है, यह सबसे अहम होगा। यदि यह मामला कोर्ट-मॉनिटर प्रोब तक पहुंचता है, तो पंजाब सरकार के लिए प्रशासनिक और कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
