भारत अपने क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को तेजी से पूरा करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी और 2070 तक नेट-जीरो एमिशन हासिल करना है। हालांकि, देश को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है: इस दशक के अंत तक सालाना लगभग $160 बिलियन का क्लाइमेट फाइनेंसिंग गैप। इसी को देखते हुए, British International Investment (BII) और Copenhagen Infrastructure Partners (CIP) ने इस सेक्टर में जरूरी पूंजी डालने के लिए '$300 मिलियन' का 'North Star' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
यह 'North Star' प्लेटफॉर्म भारत के रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में फाइनेंसिंग और एग्जीक्यूशन की खाई को पाटने का काम करेगा। डेवलपर्स को अक्सर प्रोजेक्ट्स को डेवलपमेंट से ऑपरेशन तक ले जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। BII और CIP दोनों ही 'North Star' में $150 मिलियन तक का निवेश करेंगे, जिसमें सोलर, विंड, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और बैटरी स्टोरेज पर फोकस किया जाएगा।
इस साझेदारी से पर्यावरण और एनर्जी सेक्टर को बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। इस प्लेटफॉर्म से सालाना 40 लाख MWh से ज्यादा क्लीन एनर्जी उत्पन्न होने का अनुमान है। साथ ही, यह हर साल लगभग 40 लाख टन कार्बन एमिशन को कम करने में मदद करेगा। BII के एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर हेड रोहित आनंद ने कहा कि यह लॉन्च भारत की मजबूत रिन्यूएबल एनर्जी ग्रोथ की क्षमता और क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन को तेज करने में कैटेलिटिक कैपिटल (catalytic capital) की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। CIP के पार्टनर पीटर Jannik Sjøntoft ने पुष्टि की कि भारत एक प्रमुख ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट है और यह साझेदारी इंफ्रास्ट्रक्चर डिलीवरी को मजबूत करेगी। 'North Star', BII की बड़ी £1.1 बिलियन की क्लाइमेट फाइनेंस इनिशिएटिव, ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स के तहत पहला निवेश भी है, जिसका लक्ष्य एशिया भर में क्लाइमेट प्रोजेक्ट्स के लिए इंस्टीट्यूशनल कैपिटल (institutional capital) जुटाना है।