BHARAT Bond ETF - April 2032 ने डेट ETF सेगमेंट में अपनी धाक जमाई है। पिछले तीन सालों में इस ETF ने **8.0%** का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) यानी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है, जो इसे इस कैटेगरी में सबसे ऊपर रखती है।
कैसे रहा प्रदर्शन?
BHARAT Bond ETF - April 2032 का प्रदर्शन शानदार रहा है, जिसने 8.0% का CAGR दर्ज किया है। यह उन फंड्स में टॉप पर है जिनका एसेट ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है। इसी सीरीज के अप्रैल 2033 और अप्रैल 2031 मैच्योरिटी वाले फंड्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिन्होंने क्रमशः 8.0% और 7.9% का रिटर्न दिया है।
एसेट साइज में कौन आगे?
भले ही अप्रैल 2032 सीरीज रिटर्न में आगे रही हो, लेकिन एसेट साइज के मामले में BHARAT Bond ETF - April 2030 सबसे बड़ा है। इसके पास ₹25,215.4 करोड़ का कॉर्पस है। इन फंड्स में रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का भरोसा साफ दिखता है, क्योंकि ये सरकारी गारंटी वाले डेट सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, जिनमें क्रेडिट रिस्क कम होता है।
बेंचमार्क को छोड़ा पीछे?
निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि ये ETF अपने बेंचमार्क इंडेक्स को कैसे मात देते हैं। अप्रैल 2032 ETF ने तीन साल में अपने बेंचमार्क से 0.9% ज़्यादा रिटर्न दिया है। वहीं, एक साल के भीतर इसने 5.7% का रिटर्न दिया, जो बेंचमार्क के 2.6% रिटर्न से 3.1% ज़्यादा है।
निवेशकों के लिए खास बातें
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि डेट ETF की रैंकिंग समय के साथ बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, तीन महीने के रिटर्न में अप्रैल 2031 फंड 3.8% रिटर्न के साथ सबसे आगे रहा।
टारगेट मैच्योरिटी ETF, आम डेट म्यूचुअल फंड से अलग काम करते हैं। ये बॉन्ड्स की मैच्योरिटी तक उन्हें होल्ड करते हैं, जिससे री-इन्वेस्टमेंट का रिस्क कम होता है। हालांकि, इनकी कमाई इकोनॉमी में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं, जिससे ETF के नेट एसेट वैल्यू पर असर पड़ सकता है, खासकर अगर उसे मैच्योरिटी से पहले बेचा जाए। लेकिन, अगर मैच्योरिटी तक होल्ड किया जाए, तो निवेशकों को तय रकम वापस मिल जाती है। क्योंकि ये ETF स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, इसलिए निवेशकों को ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी नज़र रखनी चाहिए ताकि वे सही कीमत पर यूनिट्स खरीद या बेच सकें।
