Ayush Sector: रिसर्च में आया बड़ा उछाल, 2014 से पेटेंट फाइलिंग में **836%** की शानदार बढ़ोतरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ayush Sector: रिसर्च में आया बड़ा उछाल, 2014 से पेटेंट फाइलिंग में **836%** की शानदार बढ़ोतरी

भारत के Ayush सेक्टर में रिसर्च को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल **2014** से अब तक कुल **4,077** पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए हैं, जो एविडेंस-बेस्ड मेडिसिन की तरफ बढ़ते कदम को दर्शाते हैं।

भारत का Ayush सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2026 फाइनेंशियल ईयर के बीच एनुअल पेटेंट फाइलिंग में 836% से ज्यादा का उछाल आया है। यह बदलाव पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की कोशिश को दिखाता है।

महामारी के बाद रिसर्च में तेजी

कोविड-19 महामारी के बाद से रिसर्च की रफ्तार काफी तेज हुई है। 2014 से दर्ज किए गए कुल पेटेंट आवेदनों में से लगभग 70% केवल 2020 से 2026 के बीच फाइल किए गए। इसी अवधि में कुल पेटेंट ग्रांट्स का 92.4% हिस्सा भी जारी किया गया, जो दर्शाता है कि रेगुलेटरी सिस्टम अब तेजी से काम कर रहा है।

कौन कर रहा है इनोवेशन?

आमतौर पर फार्मा सेक्टर में बड़ी कंपनियां रिसर्च का नेतृत्व करती हैं, लेकिन Ayush सेक्टर का परिदृश्य थोड़ा अलग है। यहाँ 2,113 आवेदन व्यक्तिगत इनोवेटर्स ने और 995 आवेदन शैक्षणिक संस्थानों ने दिए हैं। इन दोनों का कुल योगदान पेटेंट एक्टिविटी में 76% से ज्यादा है, जबकि स्टार्टअप्स का योगदान 144 फाइलिंग्स के साथ अभी कम है।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

निवेशकों के लिए यह एक अहम संकेत है। पेटेंट मिलने से कंपनियों को अपने प्रोडक्ट को अलग बनाने और बेहतर प्राइजिंग पावर हासिल करने में मदद मिलती है। हालांकि, पेटेंट से लेकर बाजार तक का सफर आसान नहीं है। एक पेटेंट को कमर्शियल प्रोडक्ट बनाने के लिए क्लीनिकल ट्रायल और मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश की जरूरत होती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कितने इनोवेटर्स अपनी तकनीक को बड़ी FMCG या फार्मा कंपनियों को लाइसेंस देने में सफल रहते हैं, क्योंकि मेडिकल रिसर्च में जोखिम हमेशा बना रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.