Ayodhya Ram Temple: डोनेशन में चोरी के बाद मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव, नियुक्त हुए पहले CEO

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ayodhya Ram Temple: डोनेशन में चोरी के बाद मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव, नियुक्त हुए पहले CEO

Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust ने एक बड़े डोनेशन घोटाले के बाद मंदिर की सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। SIT की जांच में **105** बार चोरी की पुष्टि हुई, जिसके बाद ट्रस्ट ने पहले CEO की नियुक्ति और कर्मचारियों के लिए सख्त वेरिफिकेशन नियम लागू किए हैं।

सुरक्षा और प्रशासन का नया खाका

मंदिर ट्रस्ट ने डोनेशन में हुई धांधली के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। उन्होंने 21 सितंबर, 2026 को कार्यभार संभाला है और अब मंदिर की पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वहीं, पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, SIT की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली है और वे अब इस मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह हैं।

कैसे पकड़ी गई चोरी?

SIT की जांच ने पूरे मामले का पर्दाफाश किया। जांच एजेंसी ने 70,000 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है, जिसमें CCTV फुटेज के जरिए 105 बार चोरी की घटनाओं को दर्ज किया गया है। इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अब मंदिर में क्या बदला?

भविष्य में किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए ट्रस्ट ने कड़े नियम बनाए हैं:

  • सभी कर्मचारियों के लिए 100% पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
  • डोनेशन काउंटिंग स्टाफ के लिए जेब रहित (pocketless) जंपसूट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाइल फोन ले जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
  • सुरक्षा के लिए भविष्य में AI-इनेबल्ड सर्विलांस तकनीक लगाने की योजना है।

फिलहाल, मामला कोर्ट में है और मुख्य आरोपी सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर यादव की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 6 और 7 अक्टूबर, 2026 को होनी है। मंदिर प्रशासन के लिए अब अपनी साख को वापस हासिल करना और सुचारू रूप से व्यवस्था चलाना सबसे बड़ी चुनौती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.