🚩 Interworld Digital में बड़ा गवर्नेंस संकट, ऑपरेशनल स्थिति चिंताजनक
Interworld Digital लिमिटेड की 2 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग की घोषणा में एक बड़ी कमी दिखी - 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अनऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Unaudited Standalone Financial Results) गायब थे। इसकी जगह, फाइलिंग ने एक ऐसी कंपनी की तस्वीर पेश की जो गंभीर ऑपरेशनल और गवर्नेंस समस्याओं से जूझ रही है। ये मुद्दे पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY 2024-2025) के लिए ऑडिटर की टिप्पणियों में विस्तार से बताए गए हैं।
ऑडिटर की गंभीर रिपोर्ट:
फर्जीवाड़ा और ज़ीरो रेवेन्यू का आरोप: सबसे चौंकाने वाली बात ऑडिटर की यह पाई गई है कि पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) ने कथित तौर पर कंपनी के पूरे बिज़नेस और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को अपनी ही कंपनियों में अवैध रूप से ट्रांसफर कर दिया। इस कथित कृत्य के चलते FY24-25 में एक बड़ा सच सामने आया: कंपनी को बिज़नेस से 'कोई रेवेन्यू नहीं' हुआ। फिलहाल, कंपनी इस बिज़नेस और संपत्तियों को वापस पाने के प्रयास कर रही है।
भारी स्टैच्यूटरी ड्यूज़ (Statutory Dues): कंपनी पर बड़ी देनदारियां अभी भी बनी हुई हैं। FY 2009-10 से ₹1.91 करोड़ (जिसमें सर्विस टैक्स/TDS/प्रोफेशनल टैक्स शामिल हैं) का स्टैच्यूटरी ड्यूज़ बकाया है। चिंता की बात यह है कि इन लंबे समय से पड़े बकाया पर लगने वाले इंटरेस्ट और पेनल्टी के लिए कोई प्रावधान (Provision) नहीं किया गया था। कंपनी का कहना है कि इन ड्यूज़ के लिए अब प्रावधान कर दिया गया है और मैनेजमेंट भुगतान की व्यवस्था कर रहा है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि इसका मौजूदा मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ट्रेडिंग पर पाबंदी: FY 2018-19 से BSE लिस्टिंग फीस का भुगतान न होने के कारण, कंपनी के शेयर केवल ट्रेड-फॉर-ट्रेड (Trade-for-Trade) आधार पर ही ट्रेड किए जा रहे हैं, और वह भी केवल हर हफ्ते के पहले ट्रेडिंग दिन पर। इससे लिक्विडिटी (Liquidity) और निवेशकों की पहुंच बेहद सीमित हो गई है।
एकाउंटिंग में विसंगतियां: ऑडिटर ने रिसीवेबल्स (Receivables) और इन्वेस्टमेंट्स (Investments) के अकाउंटिंग ट्रीटमेंट में अंतर देखा। प्रबंधन का मानना था कि सभी देनदार वसूल किए जा सकते हैं और इन्वेस्टमेंट्स पर कोई इम्पयरमेंट (Impairment) नहीं है, जबकि ऑडिटर के अनुसार IND AS-109 के तहत इन्वेस्टमेंट्स के रियलाइजेबल वैल्यू (Realizable Value) का खुलासा न करने के कारण यह सही नहीं है।
लंबित कानूनी चुनौती: दिल्ली हाई कोर्ट में एक रिट पिटीशन (Writ Petition) दायर की गई है, जिसमें कंपनीज़ एक्ट, 2013 से पहले के अधिकृत कैपिटल (Authorized Capital) में हुई वृद्धि से संबंधित ROC फीस की एप्लीकेबिलिटी को चुनौती दी गई है।
मौजूदा फाइनेंशियल डेटा की अनुपस्थिति, इन गंभीर ऑडिटर टिप्पणियों के साथ मिलकर, Interworld Digital लिमिटेड के लिए गहरी वित्तीय संकट की तस्वीर पेश करती है। इन भारी गवर्नेंस जोखिमों और ऑपरेशनल स्थिति को देखते हुए निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।