Athulya Senior Care के मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. कार्तिक नारायण आर., अब 2026-27 के लिए CII की सीनियर केयर कमेटी के चेयरमैन होंगे। यह नियुक्ति सीनियर केयर सेक्टर के बढ़ते महत्व को दर्शाती है, जिसे 2036 तक अनुमानित 230 मिलियन बुजुर्ग भारतीयों की सेवा के लिए तैयार रहना होगा।
सीनियर केयर सेक्टर में बड़ा बदलाव
Athulya Senior Care के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. कार्तिक नारायण आर. को 2026-27 के लिए Confederation of Indian Industry (CII) की सीनियर केयर कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। 14 जुलाई 2026 को हुई इस नियुक्ति के साथ, डॉ. नारायण भारत में सीनियर हेल्थकेयर के भविष्य को आकार देने वाली एक प्रमुख इंडस्ट्री बॉडी का नेतृत्व करेंगे।
भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव से गुज़र रहा है। Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में लगभग 100 मिलियन रही 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी 2036 तक बढ़कर 230 मिलियन होने का अनुमान है। तब तक, बुजुर्ग भारत की कुल आबादी का लगभग 15% हिस्सा होंगे।
यह बदलाव हेल्थकेयर और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मांग में एक बड़ा और दीर्घकालिक परिवर्तन लाता है। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के साथ, संरचित देखभाल मॉडल, विशेष जेरियाट्रिक सेवाएं और समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर की स्पष्ट आवश्यकता है। फिलहाल, भारत में सीनियर केयर मार्केट एक बड़े पैमाने पर असंगठित, परिवार-निर्भर मॉडल से हटकर अधिक पेशेवर और संस्थागत सेवाओं की ओर बढ़ रहा है।
नई नीतिगत पहल और इंडस्ट्री पर असर
अपनी नई भूमिका में, डॉ. नारायण का लक्ष्य इंडस्ट्री लीडर्स, हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। कमेटी का मुख्य फोकस साक्ष्य-आधारित नीतिगत सिफारिशें तैयार करना है जो तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करेंगी: दीर्घकालिक देखभाल की व्यवस्था, कुशल देखभाल करने वाले कार्यबल का विकास, और जेरियाट्रिक टेक्नोलॉजी में नवाचार को बढ़ावा देना।
निवेशकों के नज़रिए से, ऐसी कमेटियों का गठन महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अक्सर रेगुलेटरी सुधारों के लिए एक पुल का काम करती हैं। देखभाल के मानकों, सीनियर लिविंग फैसिलिटी के लिए मान्यता (accreditation), और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संभावित प्रोत्साहनों पर स्पष्ट दिशानिर्देश प्राइवेट कंपनियों के ऑपरेशंस को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि Athulya Senior Care एक प्राइवेट कंपनी है, लेकिन इंडस्ट्री का मानकीकरण (standardization) समग्र रूप से प्रवेश बाधाओं को कम कर सकता है और पूरे सेक्टर में सेवा की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।
आगे क्या देखना ज़रूरी?
निवेशकों और पर्यवेक्षकों को कमेटी की आने वाली नीतिगत सबमिशन पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये जेरियाट्रिक केयर फाइनेंसिंग या इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट के संबंध में भविष्य की सरकारी पहलों का संकेत दे सकती हैं। प्रमुख निगरानी क्षेत्रों में कार्यबल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति और असिस्टेड लिविंग फैसिलिटीज के लिए कोई भी नए मानक शामिल हैं जो कंपनियों की ऑपरेटिंग लागत और विस्तार की रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। जैसे-जैसे यह सेक्टर विकसित हो रहा है, कंपनियों की उच्च सेवा गुणवत्ता बनाए रखने की क्षमता, कुशल श्रम की लागत का प्रबंधन करते हुए, दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए एक निर्णायक कारक बनी रहेगी।
