असम सरकार ने हाल की बाढ़ से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए घरों वाले परिवारों को ₹75,000 प्रति परिवार की अंतरिम राहत राशि का वितरण शुरू कर दिया है। प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 1.36 लाख हो गई है, लेकिन शिवसागर और जोरहाट सहित पांच जिलों में राहत अभियान सक्रिय हैं, जबकि अधिकारी पुनर्प्राप्ति के प्रयासों का प्रबंधन कर रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों को मिली आर्थिक मदद
असम सरकार ने हाल की बाढ़ से तबाह हुए परिवारों को वित्तीय सहायता देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ से अंतरिम राहत भुगतान की शुरुआत की। जिन परिवारों के घरों को गंभीर नुकसान हुआ है, उन्हें अब प्रति परिवार कुल ₹75,000 का पैकेज मिल रहा है, जिसमें ₹15,000 की शुरुआती राशि के साथ अन्य सहायक सहायता भी शामिल है।
बाढ़ का हाल और मौतें
हालांकि बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, लेकिन जान-माल का नुकसान अभी भी महत्वपूर्ण है। इस बाढ़ लहर में मरने वालों की कुल संख्या 85 हो गई है, जिसमें रविवार को शिवसागर जिले में तीन नई मौतें दर्ज की गईं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को लगभग 1.8 लाख प्रभावित लोगों की संख्या सोमवार तक घटकर 1.36 लाख हो गई है, लेकिन इसका असर कुछ खास इलाकों में केंद्रित है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
शिवसागर सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है, जहां 55,000 से अधिक निवासी अभी भी विस्थापित हैं। अन्य प्रभावित जिलों में चराईदेव (Charaideo) शामिल है, जहां लगभग 40,000 लोग प्रभावित हैं, और जोरहाट (Jorhat), जहां 22,000 से अधिक निवासी प्रभावित हैं। राज्य प्रशासन वर्तमान में 13,771 विस्थापित लोगों के रहने के लिए 54 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित कर रहा है।
कृषि और नदियों का हाल
आर्थिक प्रभाव आवासीय क्षति से परे है, क्योंकि कृषि गतिविधियों को गंभीर रूप से बाधित किया गया है। वर्तमान में, राज्य भर में 15,422 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। पानी का यह लंबा जलभराव स्थानीय किसानों के लिए एक चुनौती पेश करता है, जो आगामी फसल सीजन में फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, प्रमुख नदी प्रणालियों में पानी का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है, जिसमें गोलाघाट जिले के न्युमलिगढ़ (Numaligarh) में धनसिरी नदी (Dhansiri River) खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
आगे क्या?
अधिकारी शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट और धीमाजी (Dhemaji) जिलों में तत्काल पुनर्वास और राहत शिविरों के प्रबंधन पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उम्मीद है कि जैसे-जैसे पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होगा, राज्य सरकार इन ऑपरेशनों की निगरानी जारी रखेगी।
