असम में बाढ़ का कहर जारी: सरकार ने मांगी 6 महीने की लोन मोरेटोरियम, बीमा दावों में तेजी के भी निर्देश

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AuthorAditya Rao|Published at:
असम में बाढ़ का कहर जारी: सरकार ने मांगी 6 महीने की लोन मोरेटोरियम, बीमा दावों में तेजी के भी निर्देश

असम इस वक्त बाढ़ की भीषण आपदा से जूझ रहा है, जहाँ अब तक **82** लोगों की जान जा चुकी है और **1.9 लाख** से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं। राज्य सरकार इस मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद के लिए बीमा कंपनियों और बैंकों के साथ मिलकर काम कर रही है। सरकार की योजना प्रभावित जिलों में कर्जदारों के लिए **6 महीने** की लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) लागू करवाने की है।

बाढ़ से तबाह असम, 5 जिलों में हालात गंभीर

असम में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे लगभग 2 लाख लोग पांच जिलों में फंसे हुए हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को वित्तीय राहत पहुंचाने के लिए कमर कस ली है, खासकर जिनकी प्रॉपर्टी, मवेशी और गाड़ियां बाढ़ में बह गईं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चारादेव जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। डिकहूं और धनसिरी जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बीमा दावों और लोन पर सरकार की बड़ी पहल

सरकार की कोशिश है कि बाढ़ से पीड़ित लोगों और छोटे बिजनेसमैन को जल्द से जल्द आर्थिक सहारा मिले। इसी कड़ी में, राज्य सरकार बीमा कंपनियों के साथ मिलकर नुकसान के क्लेम (Claim) को जल्दी निपटाने पर जोर दे रही है। इस मामले पर 5 अगस्त को पब्लिक और प्राइवेट बीमा कंपनियों के साथ एक अहम बैठक होनी है, ताकि फंसे हुए मामलों को प्राथमिकता दी जा सके।

इसके अलावा, सरकार कर्ज के बोझ तले दबे लोगों को राहत देने के लिए भी सक्रिय है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की मीटिंग के बाद, अब नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से बात की जा रही है कि शिवसागर, चारादेव, जोरहाट और गोलाघाट जैसे सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों के कर्जदारों को 6 महीने के लिए लोन की किश्तें चुकाने से छूट (Moratorium) दी जाए।

राहत कैंपों में 13,000 लोग, आगे क्या?

बाढ़ की वजह से 13,000 से ज़्यादा लोग फिलहाल 54 सरकारी राहत कैंपों में शरण लिए हुए हैं। वहीं, 5,384 लोगों को 26 वितरण केंद्रों से मदद मिल रही है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि NBFCs इस लोन मोरेटोरियम को कब तक लागू करती हैं और बीमा कंपनियों से क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया कितनी तेज होती है। सरकार अभी नुकसान का आकलन कर रही है, जिससे पता चलेगा कि मरम्मत के लिए कितने फंड की ज़रूरत पड़ेगी। इन राहत पैकेजों की सफलता काफी हद तक स्थानीय प्रशासन, बैंकों और बीमा कंपनियों के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.