Assam और Arunachal Pradesh के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को खत्म करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने **33** विवादित गांवों को श्रेणियों में बांटकर समाधान प्रक्रिया को तेज कर दिया है, जिससे नॉर्थ-ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी।
समाधान का स्ट्रक्चरल फॉर्मूला
दोनों राज्यों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने एक नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 33 गांवों को तीन अलग-अलग कैटेगरीज में विभाजित किया गया है। पहली कैटेगरी में 9 गांवों को रखा गया है, जहां तुरंत सीमा स्तंभ (boundary pillars) लगाए जाएंगे। वहीं, 22 अन्य गांवों के मामलों को जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है, ताकि उनका निपटारा तेजी से हो सके। शेष 2 जटिल मामलों के लिए स्थानीय स्तर पर विस्तृत परामर्श की आवश्यकता है। Survey of India को औपचारिक मैपिंग और सीमांकन के लिए 2 महीने की समय सीमा दी गई है।
Namsai Declaration और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह प्रशासनिक पहल साल 2022 के 'Namsai Declaration' का परिणाम है, जिसने विवादित गांवों की संख्या 123 से घटाकर 86 कर दी थी। इस विवाद की जड़ें 1951 की 'Gopinath Bordoloi committee' की सिफारिशों में हैं। वर्तमान प्रयास पुरानी शिकायतों को दूर करते हुए 'स्टेтус-क्वो' (status quo) बनाए रखने पर केंद्रित हैं ताकि कोई नया अतिक्रमण न हो।
इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
सीमा विवादों का समाधान रीजनल इकोनॉमी के लिए अहम है। इससे North-East में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स, जैसे 2000 MW का Subansiri Lower Hydroelectric Project (जिसे NHPC संचालित करती है), के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनेगा। स्पष्ट सीमाएं होने से काम में रुकावटें कम होंगी और प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने का रिस्क घटेगा।
भविष्य की चुनौतियां
प्रगति के बावजूद, जमीन के स्वामित्व से जुड़े जटिल मामले अभी भी चुनौती बने हुए हैं। फिलहाल दोनों राज्य सरकारों ने विश्वास बहाली के लिए एक-दूसरे के प्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और नए अतिक्रमण न करने पर सहमति जताई है। इस पूरी प्रक्रिया की अगली बड़ी समीक्षा साल 2026 के अंत में की जाएगी।
