अरुणाचल प्रदेश के नामसाई में पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में **51** लोगों को बचाया गया है, जिनमें **47** मासूम बच्चे शामिल हैं। मामले में **5** आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
अवैध वसूली और लेबर एक्सप्लॉइटेशन
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह गरीब परिवारों को झांसा देकर बच्चों को ले जाता था। जांचकर्ताओं के अनुसार, बिचौलिए परिवारों को प्रति बच्चा ₹10,000 से ₹50,000 के बीच भुगतान करते थे। बेहतर शिक्षा और जीवन स्तर का लालच देकर इन बच्चों को असम और अरुणाचल के विभिन्न होटलों और घरों में बाल मजदूरी के लिए धकेल दिया जाता था। यह घटना विशेष रूप से हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में रेगुलेटरी कंप्लायंस की कमी को उजागर करती है।
कानूनी कार्रवाई और बिजनेस पर असर
नामसाई के एसपी संगे थिनले ने पुष्टि की है कि बच्चों के बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज किए गए हैं। कबा गांव के एक प्रमुख फैसिलिटेटर समेत 5 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
स्थानीय सर्विस सेक्टर और हॉस्पिटैलिटी व्यवसायों के लिए यह एक बड़ा सबक है। अब इन क्षेत्रों में सप्लाई चेन ड्यू डिलिजेंस और लेबर सोर्सिंग की कड़ी जांच हो सकती है। आने वाले समय में रेगुलेटरी एजेंसियां ऐसी फर्मों पर कड़ा रुख अपना सकती हैं, जिससे ऑपरेशनल ऑडिट और सख्त नियमों का पालन अनिवार्य हो जाएगा। इन्वेस्टर्स को भी सलाह है कि वे स्थानीय सर्विस इकोनॉमी में लेबर गवर्नेंस से जुड़ी जोखिमों पर पैनी नजर रखें।
