Arunachal Pradesh के मुख्यमंत्री Pema Khandu के सीमा विवाद पर दिए गए बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। Congress पार्टी ने इसे सुरक्षा और आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़ा करते हुए घेरना शुरू कर दिया है।
सीमा पर स्थिति और राजनीतिक बयानबाजी
Arunachal Pradesh के मुख्यमंत्री Pema Khandu ने 14वें इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट के दौरान सीमा विवाद को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने चीन द्वारा किए गए सीमा उल्लंघनों को 'सामान्य' करार दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 1,200 किलोमीटर लंबी तिब्बत सीमा पर स्पष्ट सीमांकन न होने के कारण ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।
इस बयान पर पलटवार करते हुए Congress महासचिव Jairam Ramesh ने इसे सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को दबाने की कोशिश बताया। वहीं, Indo-Tibetan Border Police (ITBP) के महानिदेशक के बयानों का हवाला देते हुए विपक्ष ने तर्क दिया कि भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव जारी है, जिसे नजरअंदाज करना भारत की क्षेत्रीय स्थिति को कमजोर कर सकता है।
आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां
यह विवाद अब पूरी तरह से भारत की चीन के साथ आर्थिक रणनीति पर केंद्रित हो गया है। Congress ने $112.6 बिलियन के भारी-भरकम ट्रेड डेफिसिट पर चिंता जताई है। विपक्ष का आरोप है कि चीन से सस्ते आयात के कारण भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) पर भारी दबाव है। निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगे चलकर सरकार आयात नीतियों में सख्ती ला सकती है और मैन्युफैक्चरिंग आत्मनिर्भरता (Self-reliance) पर जोर बढ़ा सकती है।
बुनियादी ढांचा और कानूनी पेंच
विपक्ष ने Great Bend पर प्रस्तावित 60,000-MW के विशाल बांध प्रोजेक्ट का मुद्दा भी उठाया है। इसके अलावा, Pema Khandu के पुराने कार्यकाल के दौरान Public Works Department से जुड़े CBI जांच के मामले को उछालकर इस विवाद में एक नया मोड़ जोड़ दिया गया है। फिलहाल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या ये तनाव भविष्य में नई ट्रेड रेस्ट्रिक्शन (Trade restrictions) या इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी में बदलाव का कारण बनेंगे।
