Ardee Industries का **₹425.87 करोड़** का IPO निवेशकों के ज़बरदस्त रिस्पॉन्स के साथ बंद हुआ। यह इश्यू **138.83** गुना सब्सक्राइब हुआ, जो 2026 के सबसे ज्यादा सब्सक्राइब होने वाले IPOs में से एक है। अब निवेशक शेयर अलॉटमेंट का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसके बाद कंपनी **12 अगस्त** को स्टॉक एक्सचेंज पर डेब्यू करेगी।
IPO में निवेशकों का दिखा ज़बरदस्त भरोसा
Ardee Industries के पब्लिक ऑफर में बाज़ार सहभागियों की ओर से मज़बूत मांग देखी गई। 5 से 7 अगस्त, 2026 तक खुले इस IPO को लीड रीसाइक्लिंग और अलॉय मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए निवेशकों की भारी दिलचस्पी मिली। कुल मिलाकर, इश्यू 138.83 गुना सब्सक्राइब हुआ।
सभी कैटेगरी में छाई बहार
सब्सक्रिप्शन डेटा के अनुसार, इंस्टीट्यूशनल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की ओर से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का हिस्सा 202.26 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) सेगमेंट 266.75 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने कोटे को 47.77 गुना सब्सक्राइब किया। यह स्तर इस साल के सबसे बड़े सब्सक्रिप्शन मेट्रिक्स में से एक है।
IPO स्ट्रक्चर और फंड का इस्तेमाल
यह ₹425.87 करोड़ का इश्यू फ्रेश इक्विटी के ₹320 करोड़ और मौजूदा प्रमोटरों द्वारा ₹105.87 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) से बना था। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹50 से ₹53 प्रति शेयर तय किया था। फंड के इस्तेमाल की बात करें तो Ardee Industries फ्रेश इश्यू के ₹220 करोड़ का उपयोग वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। इसके अलावा, ₹20 करोड़ को कुछ बोरिंग्स के रीपेमेंट के लिए रखा गया है, जिससे कंपनी के इंटरेस्ट बर्डन को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिज़नेस और सेक्टर के रिस्क
Ardee Industries लीड रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग के क्षेत्र में काम करती है, जो एनर्जी स्टोरेज और ऑटोमोटिव जैसे प्रमुख सेगमेंट्स को सेवा प्रदान करती है। हालाँकि कंपनी के IPO को काफी अटेंशन मिली है, निवेशकों को इस सेक्टर की चुनौतियों के बारे में पता होना चाहिए। कंपनी का बिज़नेस मुख्य रूप से तिरुपति में एक सिंगल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी पर केंद्रित है, जिससे साइट पर किसी भी व्यवधान की स्थिति में ऑपरेशनल रिस्क पैदा हो सकता है। इसके अलावा, लीड रीसाइक्लिंग बिज़नेस ग्लोबल कमोडिटी प्राइस की वोलेटिलिटी के प्रति संवेदनशील है। कंपनी लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर हेजिंग स्ट्रेटेजीज़ का उपयोग करके इस रिस्क का प्रबंधन करती है, लेकिन प्राइस में उतार-चढ़ाव मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। उद्योग कड़े पर्यावरण नियमों और अनुपालन मानकों के अधीन भी है, जो लंबी अवधि की ऑपरेशनल सस्टेनेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सब्सक्रिप्शन फेज सफलतापूर्वक बंद होने के साथ, शेयरों का अलॉटमेंट 10 अगस्त, 2026 तक होने की उम्मीद है। NSE और BSE पर लिस्टिंग 12 अगस्त, 2026 के लिए निर्धारित है।
