आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू **31 अगस्त, 2026** को पुला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। कृष्णा नदी का पानी सूखे इलाकों तक पहुंचाने वाली इस परियोजना पर करीब **₹10,200 करोड़** का निवेश किया गया है, जिससे **1.19 लाख एकड़** भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
तीन दशक का इंतजार हुआ खत्म
आंध्र प्रदेश सरकार दशकों से लंबित पुला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण को 31 अगस्त, 2026 को जनता को समर्पित करने जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कृष्णा नदी के अतिरिक्त पानी को नल्लामाला सागर जलाशय में डायवर्ट करना है, ताकि प्रकाशम, नेल्लोर और कडपा जिलों के सूखे इलाकों में पानी की किल्लत को दूर किया जा सके।
इंजीनियरिंग का बड़ा नमूना
इस परियोजना में 18.8 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल (जुड़वां सुरंगें) बनाई गई हैं जो नल्लामाला की पहाड़ियों से पानी ले जाएंगी। फिलहाल पहले चरण में 10.70 TMC पानी स्टोर करने की क्षमता है। इससे न केवल 1.19 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई होगी, बल्कि लगभग 4 लाख निवासियों को फ्लोराइड-मुक्त पेयजल भी उपलब्ध होगा।
वित्तीय पहलू और चुनौतियां
यह प्रोजेक्ट राज्य के खजाने के लिए भी एक बड़ा निवेश रहा है। इसकी कुल लागत ₹10,200 करोड़ आंकी गई है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने तेजी दिखाते हुए सिविल कार्यों और टनल निर्माण पर ₹2,250 करोड़ खर्च किए हैं। इसके अलावा, पुनर्वास के विवादों को सुलझाने के लिए 6,206 विस्थापित परिवारों को ₹768 करोड़ का मुआवजा भी बांटा गया है।
हालांकि यह प्रोजेक्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है, लेकिन इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव और संचालन राज्य के बजट पर दबाव भी बनाए रखेगा। भविष्य में, राज्य की नजरें इस पर होंगी कि कैसे इस टनल-आधारित ग्रेविटी नेटवर्क का कुशल उपयोग करके 4.47 लाख एकड़ तक सिंचाई का विस्तार किया जाए और सरकारी खजाने के साथ इसका संतुलन कैसे बैठाया जाए।
