आंध्र प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 'अमरजीवी जलधारा' प्रोग्राम शुरू किया है। **₹30,156 करोड़** के इस प्रोजेक्ट से **2028** तक **27.36 लाख** ग्रामीण घरों तक नल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य है, जो वाटर इन्फ्रास्ट्रक्चर और पाइप बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने 5 अक्टूबर, 2026 को कडपा जिले के प्रोद्दतूर में 'अमरजीवी जलधारा' प्रोग्राम की शुरुआत की। केंद्रीय जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यह एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका कुल बजट ₹30,156 करोड़ तय किया गया है। इसका लक्ष्य 24,601 बस्तियों में 27.36 लाख अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराना है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का बड़ा जाल
इस प्रोजेक्ट का दायरा काफी बड़ा है। इसमें 1,426 MLD क्षमता वाले वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, 15,000 स्टोरेज स्ट्रक्चर और करीब 77,243 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। सरकार का जोर बोरवेल के बजाय जलाशयों को सीधे घरों से जोड़ने पर है, ताकि पानी की सप्लाई लंबे समय तक बनी रहे।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इन्वेस्टर के नजरिए से, यह वाटर इन्फ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर की कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है। पाइप, वॉटर पंप और वॉटर ट्रीटमेंट इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों को आने वाले 2 से 3 सालों में भारी ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में काम की रफ्तार और एग्जीक्यूशन सबसे बड़ी चुनौती होती है। जमीन अधिग्रहण, साइट की स्थिति और सरकारी फंड रिलीज में देरी जैसी समस्याएं कंपनियों के वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो पर असर डाल सकती हैं।
इसके अलावा, स्टील, सीमेंट और प्लास्टिक रेजिन जैसी रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतें कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशकों को अब टेंडर प्रक्रिया और उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिन्हें बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स मिलते हैं।
