विशाखापत्तनम Naval Dockyard जासूसी कांड में आंध्र प्रदेश पुलिस ने दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अब जांच के दायरे में कुल **18** लोग हैं, जिसने डिफेंस सेक्टर में काम करने वाली प्राइवेट कंपनियों के लिए सुरक्षा और डेटा लीक का बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
बड़ा सुरक्षा उल्लंघन (Security Breach)
आंध्र प्रदेश पुलिस के काउंटर-इंटेलिजेंस सेल ने मामले में कार्रवाई तेज करते हुए Bongu Ravi और Kadari Srinivas को हिरासत में लिया है। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पैसों के बदले नेवल असेट्स (सबमरीन और युद्धपोत) से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की। इस गिरफ्तारी के साथ अब तक कुल 4 लोग सीधे तौर पर पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
कैसे फंसे प्राइवेट कर्मचारी?
जांच में खुलासा हुआ है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर एक प्राइवेट इंजीनियरिंग फर्म के कर्मचारियों को फंसाया। यह फर्म नेवल फैसिलिटी में काम कर रही थी। हैरानी की बात यह है कि एक संदिग्ध को दिल्ली एयरपोर्ट से तब गिरफ्तार किया गया जब वह विदेश यात्रा से वापस लौट रहा था।
डिफेंस सेक्टर के लिए चिंताएं
यह घटना उन कंपनियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो डिफेंस सेक्टर के साथ मिलकर काम करती हैं। जांच में अब तक 18 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें 13 नेवल पर्सनल (नौसेना कर्मी) भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे Official Secrets Act और Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत दर्ज किया गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए अब रेगुलेटरी ओवरसाइट सख्त होने की संभावना है। सरकार आने वाले दिनों में प्राइवेट कर्मचारियों के लिए:
- सख्त बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य कर सकती है।
- साइबर सुरक्षा अनुपालन (Cybersecurity Compliance) पर जोर दिया जाएगा।
- नियमित ऑडिट बढ़ाया जा सकता है।
इन बदलावों से प्राइवेट कंपनियों के लिए बिजनेस की लागत बढ़ सकती है और प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में अधिक समय लग सकता है। मार्केट फिलहाल इस बात पर नजर बनाए हुए है कि क्या सरकार इस पूरे सप्लाई चेन के लिए कोई नए कड़े दिशा-निर्देश जारी करती है या नहीं।
