केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने दिल्ली में 'INDIA' ब्लॉक की रैली पर निशाना साधा है। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर प्रोटेस्ट आयोजित करने को पीड़ितों के प्रति अपमानजनक बताया है। हालांकि इस राजनीतिक खींचतान का बाजार पर सीधा असर नहीं है, लेकिन यह सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने दिल्ली में आयोजित 'INDIA' ब्लॉक की रैली की आलोचना करते हुए इसे 1984 के सिख-विरोधी दंगों की यादों के प्रति असंवेदनशील बताया है। चंडीगढ़ में ₹258 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए, उन्होंने कहा कि इस तरह के गंभीर दिन पर विरोध प्रदर्शन करना पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।
विरोध का कारण और चुनावी मुद्दा
'INDIA' ब्लॉक ने रामलीला मैदान में 'चलो दिल्ली' कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग करना था। अपने भाषण के दौरान गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के 'मोहब्बत की दुकान' वाले नारे पर भी तंज कसा और कहा कि यह नारा 1984 की ऐतिहासिक घटनाओं के बिल्कुल विपरीत है।
सरकार का पक्ष
अपनी बात रखते हुए अमित शाह ने केंद्र सरकार द्वारा पीड़ितों के लिए किए गए कामों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से सरकार ने कई बंद पड़े मामलों को फिर से खोला है और प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹5 लाख की मुआवजा राशि दी है। उन्होंने इसे पिछली सरकार के रवैये से अलग बताते हुए न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यह घटना Bharatiya Janata Party (BJP) और 'INDIA' गठबंधन के बीच चल रहे राजनीतिक वाद-विवाद का हिस्सा है। फिलहाल, इसका किसी सूचीबद्ध कंपनी या शेयर बाजार की गतिविधियों पर कोई असर नहीं है, लेकिन निवेशकों के लिए यह देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और विधायी घर्षण (legislative friction) के संकेत के तौर पर महत्वपूर्ण है।
