एजुकेशन सेक्टर की बड़ी कंपनी Allen Career Institute ने फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए लगभग **₹3,067 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी के नेट प्रॉफिट में **70%** की भारी गिरावट आई है और यह घटकर **₹41 करोड़** रह गया है।
कमाई बढ़ी, पर मुनाफे में क्यों आई भारी गिरावट?
साल 1988 में राजस्थान के कोटा में एक छोटे से ट्यूशन सेंटर से शुरू हुआ Allen Career Institute आज एक बड़ा नाम बन गया है। लेकिन, हालिया वित्तीय नतीजे बताते हैं कि कंपनी तेजी से विस्तार तो कर रही है, पर मुनाफे को बनाए रखने में संघर्ष कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में, इंस्टिट्यूट ने ₹3,067 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया। लेकिन, टैक्स के बाद कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में 70% घटकर सिर्फ ₹41 करोड़ रह गया।
बढ़ते खर्चों का असर
मुनाफे में इस भारी गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के बढ़ते ऑपरेशनल खर्चे हैं। कंपनी अपने पारंपरिक ऑफलाइन मॉडल से हटकर एक हाइब्रिड (डिजिटल + ऑफलाइन) मॉडल अपनाने की कोशिश कर रही है। इस नई रणनीति के तहत, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश और देश भर में अपनी पहुंच बढ़ाने के कारण कर्मचारियों के वेतन और मार्केटिंग पर खर्च काफी बढ़ गया है। ये बढ़े हुए खर्चे रेवेन्यू ग्रोथ से कहीं ज्यादा रहे, जिससे कंपनी के बॉटम लाइन पर दबाव साफ दिख रहा है।
Bodhi Tree Systems का निवेश और वैल्यूएशन
साल 2022 में, Bodhi Tree Systems ने Allen Career Institute में करीब $600 मिलियन का बड़ा निवेश किया था। इस निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन $1.2 बिलियन से ज्यादा हो गया था। इस पैसे का मकसद ऑफलाइन कोचिंग और ऑनलाइन लर्निंग के बीच की दूरी को पाटना था। अब कंपनी 'फिजीटल' मॉडल पर फोकस कर रही है, जिसके लिए टेक्नोलॉजी और कंटेंट पर काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
बदलता एजुकेशन सेक्टर और भविष्य की चुनौतियां
भारत का कोचिंग सेक्टर तेजी से बदल रहा है। Kota के पारंपरिक मॉडल को अब डिजिटल-फर्स्ट स्टार्टअप्स और दूसरे क्षेत्रीय प्लेयर्स से कड़ी चुनौती मिल रही है, जो छात्रों को ज्यादा फ्लेक्सिबल लर्निंग ऑप्शन दे रहे हैं। Allen के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपना मार्केट शेयर बनाए रखे और डिजिटल मॉडल को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करे, बिना अपने मुनाफे को और कम किए।
Allen Career Institute एक प्राइवेट कंपनी है और स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है। इसलिए, इसके शेयरों की कीमत ट्रैक करने का कोई सार्वजनिक जरिया नहीं है। एजुकेशन सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए, कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या उसका हाइब्रिड मॉडल ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ा पाता है और मुनाफे को वापस पटरी पर ला पाता है। बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करना और कॉम्पिटिटिव डिजिटल एजुकेशन मार्केट में बने रहना, कंपनी की भविष्य की वित्तीय सेहत के लिए अहम होगा।
