उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय **12 अक्टूबर, 2026** को नई दिल्ली में हुए पार्टी के एक अहम प्रदर्शन से नदारद रहे। **2 अक्टूबर** को उन्हें पद से हटाए जाने और **11 अक्टूबर** को लखनऊ में हुई हिंसक झड़प के बाद उनके इस गायब रहने ने राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज कर दी हैं।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जारी नेतृत्व परिवर्तन और आंतरिक कलह के बीच पूर्व अध्यक्ष अजय राय की दिल्ली में पार्टी के प्रदर्शन से दूरी ने संगठन में गहरे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। यह घटनाक्रम लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर हुई हालिया हिंसक झड़प के बाद आया है, जो राज्य इकाई के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।\n\n### नेतृत्व परिवर्तन पर घमासान\n\nपार्टी ने 2 अक्टूबर, 2026 को अजय राय को पद से हटाकर आराधना मिश्रा को कमान सौंपी थी। हालांकि, यह बदलाव सुचारू नहीं रहा। 11 अक्टूबर को लखनऊ स्थित कांग्रेस दफ्तर में अजय राय के समर्थकों और अन्य कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट ने साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर असंतोष काफी गहरा है। इस विवाद का असर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है, जो आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का मुख्य स्तंभ है।\n\n### गंभीर आरोप और दलित राजनीति पर संकट\n\nसंगठन की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब दलित महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी ने अजय राय पर दुर्व्यवहार और दलित-विरोधी आचरण के गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब पार्टी राज्य में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। यदि ये आरोप अनसुलझे रहते हैं, तो पार्टी की सामाजिक छवि को बड़ा नुकसान हो सकता है।\n\n### सियासी भविष्य पर सस्पेंस\n\nअजय राय का इतिहास रहा है कि वे पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का हिस्सा रह चुके हैं, जिसके बाद उन्होंने 2012 में कांग्रेस का दामन थामा था। अब उनकी नाराजगी और दिल्ली के प्रदर्शन से दूरी ने उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। वाराणसी क्षेत्र में अपनी पकड़ रखने वाले राय को लेकर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व क्या रुख अपनाता है, यह आने वाले हफ्तों में साफ हो जाएगा।
