ज्यूरिख में एयर इंडिया (Air India) की फ्लाइट AI 151 के पायलट को सोब्रिएटी टेस्ट (sobriety test) में फेल होने के बाद ड्यूटी से हटा दिया गया है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब DGCA पर US FAA के आगामी ऑडिट का भारी दबाव है।
घटना 6 सितंबर की है, जब ज्यूरिख में एयर इंडिया के एक पायलट अनिवार्य सोब्रिएटी टेस्ट पास नहीं कर पाए। स्विस फेडरल ऑफिस ऑफ सिविल एविएशन (FOCA) ने पुष्टि की है कि पायलट के ब्लड में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक थी। इस मामले की जानकारी तुरंत भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को दे दी गई है।
FAA ऑडिट का संकट
यह घटना भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए एक संवेदनशील समय पर हुई है। DGCA जल्द ही अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के एक महत्वपूर्ण ऑडिट का सामना करने वाला है। यह ऑडिट भारत की सेफ्टी निगरानी क्षमताओं का आकलन करेगा। यदि सुरक्षा नियमों में कोई भी कमी पाई जाती है, तो अमेरिकी रूट्स पर उड़ानों के संचालन पर प्रतिबंध या कड़ी शर्तें लागू हो सकती हैं।
टाटा ग्रुप के सामने चुनौती
टाटा ग्रुप के स्वामित्व में एयर इंडिया इस समय अपने फ्लीट और नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मानकों का सख्ती से पालन करना कंपनी की साख के लिए अनिवार्य है। हालांकि एयरलाइन का कहना है कि उनकी इंटरनल सेफ्टी रिपोर्टिंग सिस्टम ने समय रहते हस्तक्षेप किया और उड़ान को सुरक्षित रखा, लेकिन विशेषज्ञ अब कंपनी के ग्रोथ मॉडल और सेफ्टी कल्चर के बीच संतुलन पर सवाल उठा रहे हैं।
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वे सेफ्टी नियमों को लेकर 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाते हैं। दोषी कर्मचारी पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और राष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
