Air India के बोर्ड की बैठक 15 अक्टूबर को होने वाली है, जिसमें खर्च घटाने के लिए नई नीतियों पर चर्चा होगी। भारी नुकसान के बीच कंपनी अब ऑपरेशंस को दुरुस्त करने और Air India Express के साथ बैक-एंड इंटीग्रेशन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
घाटे से उबरने की कोशिश
Air India अपने ऑपरेशंस को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कमर कस चुकी है। कंपनी ने FY26 में ₹22,238 करोड़ का भारी-भरकम नेट लॉस दर्ज किया है। इस वित्तीय दबाव के पीछे ईंधन की ऊंची कीमतें, AI171 दुर्घटना और वेस्ट एशिया में जारी तनाव जैसे कारक रहे हैं, जिसने कंपनी की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
ट्रेवल पॉलिसी में सख्ती
बोर्ड की आगामी बैठक में कंपनी सख्त कदम उठाने जा रही है। अब कर्मचारी ट्रेवल पॉलिसी को फिर से तैयार किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारी अब केवल इकोनॉमी क्लास में सफर कर पाएंगे, सिवाय उन मामलों के जहां विशेष छूट का प्रावधान हो। इसके अलावा, एम्प्लॉई लीजर ट्रेवल (ELT) पॉलिसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ तालमेल
कंपनी का मुख्य ध्यान Air India और उसकी लो-कॉस्ट यूनिट Air India Express के बीच तालमेल बिठाने पर है। यह पूरा मर्जर नहीं है, बल्कि एचआर (HR) और फाइनेंस जैसे बैक-एंड कार्यों को जोड़ना है ताकि दोहराव वाले पदों को हटाया जा सके और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
विस्तार के साथ अनुशासन
एक तरफ जहां कंपनी लागत कम करने में जुटी है, वहीं अपना विस्तार भी कर रही है। Air India Express अपना अब तक का सबसे बड़ा विंटर शेड्यूल 25 अक्टूबर, 2026 से शुरू करने जा रही है, जिसमें 585 डेली फ्लाइट्स और 40 से ज्यादा नए रूट शामिल होंगे। एयरलाइन के इस टर्नअराउंड प्लान के सफल होने में 5 से 10 साल का समय लग सकता है, और बाजार की नजर अब इस बात पर है कि ये उपाय कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को कब तक बेहतर बना पाएंगे।
