अहमदाबाद पुलिस ने हालिया बम धमाकों की फर्जी धमकियों के पीछे पाकिस्तान और बांग्लादेश के एक अवैध साइबर नेटवर्क का पता लगाया है। हैक किए गए ईमेल अकाउंट्स के जरिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाया गया था।
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने शहर के प्रमुख स्थलों को निशाना बनाकर दी गई फर्जी बम धमकियों का संबंध पाकिस्तान और बांग्लादेश में चल रहे संगठित डिजिटल ऑपरेशन से जोड़ा है। 7 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को हुई इन घटनाओं की जांच में सामने आया कि हमलावरों ने दहशत फैलाने और सार्वजनिक कार्यक्रमों को बाधित करने के लिए समझौता किए गए (compromised) ईमेल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया।
किन जगहों को बनाया गया निशाना?
धमकियों में विशेष रूप से नरेंद्र मोदी स्टेडियम और गुजरात हाई कोर्ट जैसे हाई-प्रोफाइल स्थानों को टारगेट किया गया था। इन संदेशों में अलगाववादी भाषा का इस्तेमाल किया गया और दिलजीत दोसांझ के आगामी कॉन्सर्ट जैसे सार्वजनिक आयोजनों का भी जिक्र किया गया। गूगल (Google) जैसे सर्विस प्रोवाइडर्स से मिले डेटा विश्लेषण के जरिए इन धमकियों का सोर्स बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के रावलपिंडी और लाहौर में ट्रैक किया गया है।
क्या है इनकी मॉडस ऑपरेंडी?
जांच में एक ऐसे अंडरग्राउंड मार्केट का पता चला है, जहां पुराने या असुरक्षित ईमेल अकाउंट्स के क्रेडेंशियल्स की खरीद-फरोख्त होती है। ये हैक किए गए अकाउंट्स अक्सर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए खरीदे जाते हैं और अपनी डिजिटल पहचान छिपाने के लिए कई बिचौलियों के जरिए रूट किए जाते हैं।
सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती
यह घटना क्रॉस-बॉर्डर साइबर अपराध के गंभीर खतरों को दर्शाती है। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (critical infrastructure) और सार्वजनिक स्थलों के खिलाफ हैक किए गए क्रेडेंशियल्स का उपयोग करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब प्रशासन साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस को मजबूत करने और डिजिटल हस्तक्षेप के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को अपग्रेड करने पर काम कर रहा है।
