श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और Jammu & Kashmir National Conference से भी अलग हो गए हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के साथ वैचारिक मतभेदों को इसकी बड़ी वजह बताया है। इस घटना से श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।
श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर, 2026 को आधिकारिक रूप से अपने इस्तीफे की घोषणा की। संसद सदस्यता छोड़ने के साथ ही उन्होंने Jammu & Kashmir National Conference (JKNC) के साथ अपने करीब दो दशक पुराने सफर को खत्म कर दिया है। बडगाम में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बड़ा ऐलान किया, जिसने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हलचल मचा दी है।\n\n### इस्तीफे की असली वजह\n\nयह कदम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से उमर अब्दुल्ला के साथ लंबे समय से चल रही खींचतान का परिणाम है। इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण 'अनुच्छेद 370' की बहाली को लेकर पार्टी का रुख बताया जा रहा है। रुहुल्लाह का मानना है कि पार्टी इस मुद्दे पर पर्याप्त आक्रामक नहीं है। इसके अलावा, स्थानीय आरक्षण नीतियों और गवर्नेंस के मुद्दों पर भी उनकी असहमति पार्टी की वर्तमान दिशा से मेल नहीं खा रही थी।\n\n### उपचुनाव की आहट और राजनीतिक भविष्य\n\nरुहुल्लाह के इस्तीफे के बाद अब श्रीनगर सीट पर उपचुनाव होना तय है। उनके इस फैसले से नेशनल कॉन्फ्रेंस की आंतरिक दरारें सबके सामने आ गई हैं। कश्मीर घाटी में एक प्रभावशाली चेहरा होने के नाते, उनका अलग होना पार्टी के चुनावी दबदबे को चुनौती दे सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे या किसी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे।\n\n### बाजार पर असर?\n\nनिवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह घटना पूरी तरह से एक राजनीतिक घटनाक्रम है। इसका किसी भी लिस्टेड कंपनी, फाइनेंशियल मार्केट, इक्विटी इंडेक्स या सेक्टर के प्रदर्शन पर कोई सीधा असर नहीं है। इस इस्तीफे का कोई कॉर्पोरेट या मार्केट से जुड़ा लेना-देना नहीं है।
