Africa Health Workforce: स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव, 2035 तक जुड़ेंगे 30 लाख नए हेल्थ वर्कर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Africa Health Workforce: स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव, 2035 तक जुड़ेंगे 30 लाख नए हेल्थ वर्कर

अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्रियों ने 2035 तक 30 लाख स्वास्थ्य कर्मियों को जोड़ने के लिए एक नई 10-वर्षीय रणनीति को मंजूरी दी है। इस पहल का लक्ष्य बेरोजगारी के उस विरोधाभास को खत्म करना है, जहां करीब 10 लाख योग्य पेशेवर काम की तलाश में हैं, जबकि क्षेत्र में स्टाफ की भारी कमी है।

रणनीति और लक्ष्य

अदीस अबाबा में WHO रीजनल कमेटी के 76वें सत्र के दौरान, अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्रियों ने आधिकारिक रूप से 'Africa Health Workforce Agenda 2026–2035' को मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य अगले एक दशक में 30 लाख अतिरिक्त मेडिकल पेशेवरों को नियुक्त करना है।

बेरोजगारी का विरोधाभास

यह योजना एक बड़ी सिस्टमगत खामी को दूर करने पर केंद्रित है। वर्तमान में, पूरे अफ्रीका में करीब 10 लाख योग्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता बेरोजगार हैं, जबकि दूसरी ओर पूरे महाद्वीप में 60 लाख से अधिक पेशेवरों की कमी का अनुमान है। सरकारें अब यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग और वोकेशनल एजुकेशन को सीधे पब्लिक हेल्थ सेक्टर की जरूरतों के साथ जोड़कर इस गैप को भरने की कोशिश करेंगी।

निवेश और आर्थिक प्रभाव

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, ढांचे में प्रति व्यक्ति सालाना US$4 से US$6 के अतिरिक्त निवेश का सुझाव दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ा हुआ खर्च न केवल सोशल स्टेबिलिटी को बढ़ावा देगा, बल्कि यह व्यापक आर्थिक विकास के लिए एक 'मल्टीप्लायर' की तरह काम करेगा। इस योजना के तहत, स्वास्थ्य पेशेवरों की डेंसिटी को वर्तमान 27 (प्रति 10,000 लोग) से बढ़ाकर 47 (प्रति 10,000 लोग) तक ले जाने का लक्ष्य है।

चुनौतियां और जोखिम

योजना जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही चुनौतियां भी सामने हैं। कई अफ्रीकी देशों पर भारी कर्ज का बोझ है, जिससे पब्लिक स्पेंडिंग बढ़ाना मुश्किल है। इसके अलावा, 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की समस्या एक गंभीर खतरा बनी हुई है। बेहतर वेतन और सुविधाओं की तलाश में हेल्थ वर्कर्स का दूसरे देशों में पलायन जारी है। यदि इन देशों ने प्रतिस्पर्धी वेतन और बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान नहीं किया, तो नई नियुक्तियों को रोकना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों और विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कैसे व्यक्तिगत देश अपनी वित्तीय सीमाओं के भीतर इन लक्ष्यों को धरातल पर उतारते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.