Afcons Infrastructure को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) के खिलाफ **₹335.50 करोड़** का आर्बिट्रेशन अवार्ड मिला है। हालांकि, यह रकम कंपनी के हाथ में कब आएगी, यह UPEIDA के फैसले पर निर्भर करेगा। शेयरधारकों के लिए यह खबर अहम है क्योंकि आर्बिट्रेशन क्लेम कंपनी की वर्किंग कैपिटल रिकवरी का एक बड़ा जरिया हैं।
आर्बिट्रेशन में Afcons की बड़ी जीत
दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure, जो Shapoorji Pallonji Group का हिस्सा है, को 24 अगस्त, 2026 को एक बड़ी राहत मिली है। एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) के साथ चल रहे विवाद में कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹335.50 करोड़ का अवार्ड दिया है।
अवार्ड में क्या-क्या शामिल?
इस कुल रकम में ₹152.25 करोड़ का मूल दावा (Principal Claim) शामिल है। वहीं, अवार्ड का एक बड़ा हिस्सा, यानी ₹183.25 करोड़, ब्याज के रूप में है। यह ब्याज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की बेस रेट पर तिमाही कंपाउंडिंग के साथ जोड़ा गया है, जो 1 मई, 2019 से लेकर अवार्ड की तारीख तक लागू होगा।
पेमेंट पर सस्पेंस क्यों?
निवेशकों को यह समझना होगा कि यह पैसा तुरंत कंपनी के खाते में नहीं आने वाला। यह अवार्ड तभी मिलेगा जब UPEIDA निर्धारित समय सीमा के भीतर इस फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं देती। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में यह आम बात है कि सरकारी प्राधिकरण आर्बिट्रेशन अवार्ड्स के खिलाफ अपील करते हैं। अगर UPEIDA कानूनी रास्ता अपनाती है, तो फंड मिलने में काफी देरी हो सकती है या मामला हाई कोर्ट तक जा सकता है।
वर्किंग कैपिटल के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए आर्बिट्रेशन अवार्ड्स अटके हुए कैपिटल (Blocked Capital) को वापस पाने का एक अहम जरिया होते हैं। बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, और सफल क्लेम कंपनी की लिक्विडिटी और कैश फ्लो को बेहतर बनाते हैं। यह जीत Afcons के लिए एक और सकारात्मक खबर है, क्योंकि इससे ठीक दो महीने पहले जून में, कंपनी को जम्मू और कश्मीर में एक टनल प्रोजेक्ट के लिए ₹148.67 करोड़ का आर्बिट्रेशन अवार्ड भी मिला था।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें UPEIDA के अगले कदम पर होंगी। अगर अथॉरिटी अवार्ड को स्वीकार कर लेती है, तो यह रकम कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत कर सकती है। वहीं, अगर वे इस फैसले का विरोध करते हैं, तो कंपनी को कानूनी लड़ाई जारी रखनी होगी। निवेशक इस बात पर कंपनी से और अपडेट का इंतजार करेंगे कि अवार्ड का भुगतान होता है या अथॉरिटी कानूनी चुनौती पेश करती है।
