Adina Mosque में सुरक्षा बढ़ाई गई: शिव लिंगम के दावे से गरमाया माहौल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Adina Mosque में सुरक्षा बढ़ाई गई: शिव लिंगम के दावे से गरमाया माहौल

पश्चिम बंगाल के मालदा में 14वीं सदी की अदीना मस्जिद के पास हिंदू समूहों द्वारा शिव लिंगम स्थापित करने के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस घटना ने उस स्थल की ऐतिहासिक पहचान को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को फिर से हवा दे दी है, जो वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। अधिकारियों ने स्मारक में किसी भी अनधिकृत ढांचागत बदलाव के खिलाफ चेतावनी जारी की है।

Detailed Coverage

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 14वीं सदी की प्रसिद्ध अदीना मस्जिद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह कदम हाल ही में हिंदू समूहों द्वारा मस्जिद के पास एक 3.6 फीट ऊंचे और 1.5 टन वजन वाले शिव लिंगम की स्थापना के बाद उठाया गया है। पवित्र श्रावण माह के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने इस स्थल की उत्पत्ति को लेकर सार्वजनिक बहस को फिर से तेज कर दिया है, जिसे आधिकारिक तौर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा प्रबंधित और संरक्षित किया जाता है।

स्थल का कानूनी और ऐतिहासिक संदर्भ

अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था। यह प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत एक संरक्षित स्मारक के रूप में मान्यता प्राप्त है। अपनी आधिकारिक वर्गीकरण के बावजूद, 'अदिनाथ पुरान शिव मंदिर समिति' के सदस्यों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से एक प्राचीन अदिनाथ शिव मंदिर था। वे ऐसे वास्तुशिल्प रूपांकनों (motifs) का हवाला देते हैं जिन्हें वे हिंदू और बौद्ध बताते हैं, जबकि कुछ इतिहासकार इसे मस्जिद के निर्माण के दौरान पुरानी संरचनाओं से सामग्री के पुन: उपयोग के रूप में समझाते हैं।

समिति ने स्मारक परिसर के भीतर शिव लिंगम स्थापित करने के लिए औपचारिक कानूनी अनुमति लेने का इरादा व्यक्त किया है। हालांकि, जिला प्रशासन ने एक सार्वजनिक सलाह जारी की है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि संरक्षित स्थल के भीतर अनधिकृत धार्मिक गतिविधियां या ढांचागत परिवर्तन मौजूदा कानूनों के तहत सख्ती से निषिद्ध हैं। संभावित भीड़ की निगरानी करने और किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए पुलिस की मौजूदगी उच्च स्तर पर बनी हुई है।

राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम

पिछले एक साल में यह विवाद राजनीतिक ध्यान आकर्षित कर चुका है, जिसमें विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों ने स्मारक के ऐतिहासिक पदनाम पर सवाल उठाए हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) वर्तमान में लंबित है, जो संरचना के ASI वर्गीकरण को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता इस आधार पर तर्क दे रहे हैं कि स्थल में ऐसी मूर्तियां हैं जो एक पुराने मंदिर का सुझाव देती हैं, जबकि ASI परिसर की वर्तमान पहचान एक मस्जिद के रूप में बनाए रखता है।

निवेशकों और पर्यवेक्षकों को कलकत्ता उच्च न्यायालय में होने वाली आगामी कानूनी कार्यवाही पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसका परिणाम क्षेत्र में अन्य संरक्षित पुरातात्विक स्थलों के प्रबंधन और व्याख्या के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। मुख्य निगरानी यह है कि प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने में कितना सक्षम है, जबकि स्मारक की स्थिति के बारे में कानूनी दलीलें अदालत में चल रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.