इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ा मार्केट
Adani Power, IT की दिग्गज कंपनी Infosys को मार्केट कैपिटलाइजेशन में पीछे छोड़ चुकी है। यह भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर से इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटीज़ की ओर फंड्स के बड़े बदलाव को दर्शाता है। Infosys को घटते IT खर्च और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, डोमेस्टिक कैपेसिटी के आक्रामक विस्तार के कारण यूटिलिटी सेक्टर में ग्रोथ दिख रही है। BSE पर यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड IT सेवाओं के बजाय टेंजिबल एसेट ग्रोथ और पावर जनरेशन क्षमता वाली कंपनियों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का Adani Group पर भरोसा
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स इस तेजी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में SBI म्यूचुअल फंड ने Adani Enterprises में एक बड़ा स्टेक खरीदा है, जो डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट को दिखाता है। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब एक बड़े इमर्जिंग मार्केट्स फंड ने अपने शेयर बेच दिए थे। यह बताता है कि जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सावधानी बनी हुई है, वहीं लोकल इंस्टीट्यूशंस Adani स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। अमेरिका के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल के साथ हालिया $275 मिलियन का सेटलमेंट भी रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करके इन्वेस्टर्स का कॉन्फिडेंस बढ़ा रहा है।
परफॉरमेंस में अंतर और वैल्यूएशन की चिंता
Adani Power ने साल-दर-तारीख 67% का रिटर्न दिया है, जो Infosys के 29% की गिरावट के बिल्कुल विपरीत है। Infosys की गिरावट की वजह बढ़ती वेज कॉस्ट और प्रोजेक्ट कैंसलेशन को बताया जा रहा है। Bernstein जैसी फर्मों से पॉजिटिव एनालिस्ट सेंटीमेंट के बावजूद, Adani Total Gas और ग्रुप की अन्य कंपनियों में तेज़ उछाल मोमेंटम-ड्रिवन मार्केट को दिखाता है। ये स्टॉक्स हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे ऑपरेशनल गलतियों या तिमाही टारगेट्स चूकने की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।
स्ट्रक्चरल रिस्क और निवेशक की सावधानी
सकारात्मक मार्केट सेंटीमेंट के बावजूद, Adani Group की एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी में स्ट्रक्चरल रिस्क हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए हाई डेट सर्विसिंग की ज़रूरतें बढ़ती ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स से प्रभावित हो सकती हैं। वैल्यू अनलॉक करने के लिए बार-बार डीमर्जर की स्ट्रैटेजी एग्जीक्यूशन रिस्क भी लाती है। अमेरिका के साथ लीगल मुद्दे भले ही सुलझ गए हों, लेकिन ग्रुप पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर अभी भी नज़र रखी जा रही है। Adani Group की सब्सिडियरीज पर हाई लीवरेज बना हुआ है, जो उन्हें क्रेडिट रेटिंग में बदलाव या सरकारी यूटिलिटी प्राइसिंग पॉलिसीज़ में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मोमेंटम से प्रेरित तेजी फंडामेंटल कैश फ्लो से अलग हो सकती है, और अगर इंफ्रास्ट्रक्चर डेट के लिए निवेशकों की भूख कम होती है तो इसमें तेज करेक्शन आ सकता है।
