Adani Group ने अपने 34वें एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में वित्त वर्ष 2026 के लिए **₹1.53 लाख करोड़** के रिकॉर्ड कैपिटल स्पेंड का ऐलान किया है। कंपनी का फोकस एयरपोर्ट्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर्स पर रहेगा। वहीं, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने Adani Enterprises को 'Overweight' रेटिंग दी है।
ग्रुप का मेगा इन्वेस्टमेंट प्लान
Adani Group ने अपने 34वें एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में वित्त वर्ष 2026 के लिए आक्रामक ग्रोथ का रोडमैप पेश किया है। ग्रुप ₹1.53 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कैपिटल स्पेंड करेगा, जिसमें एयरपोर्ट्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर्स जैसे क्षेत्रों में क्षमता विस्तार पर जोर दिया जाएगा। इस बड़े निवेश का लगभग 80% कोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा, जिसमें नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स और न्यू एनर्जी व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो का विस्तार शामिल है। ग्रुप का टोटल एसेट बेस बढ़कर ₹7.85 लाख करोड़ हो गया है।
Adani Enterprises पर Morgan Stanley का भरोसा
इसी बीच, ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने Adani Enterprises, जो ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी है, पर 'Overweight' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। फर्म ने स्टॉक के लिए ₹3,638 का टारगेट प्राइस सेट किया है। Morgan Stanley Adani Enterprises को नए व्यवसायों के लिए एक 'इनक्यूबेटर' के रूप में देखता है और वित्त वर्ष 2027 तक प्रमुख प्रोजेक्ट्स के चालू होने से कंपनी की कमाई में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है।
मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
Adani Group ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹94,834 करोड़ का रिकॉर्ड EBITDA दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 5.6% अधिक है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट का योगदान 87% रहा, जो ग्रुप के कोर बिजनेस की मजबूती को दर्शाता है।
फंडिंग और कर्ज का प्रबंधन
बड़े प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के लिए, ग्रुप के पास ₹55,852 करोड़ का कैश रिजर्व है, जो इसके कुल कर्ज का लगभग 15% कवर करता है। कंपनी ने यह भी बताया कि उसका औसत बॉरोइंग कॉस्ट घटकर 7.8% हो गया है, जो दो साल पहले 9% था। यह ब्याज लागत में कमी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस के प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हो सकता है।
जोखिम और आगे क्या देखें
हालांकि, ग्रुप अभी भी भारी निवेश योजनाओं के कारण एक हाईली लेवरेज्ड एंटिटी है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लंबे समय तक निवेश की जरूरत होती है और उन्हें महत्वपूर्ण कैश फ्लो उत्पन्न करने में कई साल लगते हैं। निवेशकों को प्रोजेक्ट्स के एक्जीक्यूशन, निर्माण में देरी, लागत में बढ़ोतरी या मांग में धीमी वृद्धि जैसे जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। भविष्य में, निवेशक मुख्य प्रोजेक्ट्स, खासकर नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और न्यू एनर्जी डिवीजन में क्षमता विस्तार की टाइमलाइन पर, साथ ही EBITDA मार्जिन, कर्ज के स्तर और बॉरोइंग कॉस्ट में कमी पर ध्यान देंगे।
