Adani Group द्वारा संचालित एयरपोर्ट के ड्यूटी-फ्री शॉप्स में निकोटीन पाउच की बिक्री पर अब कस्टम विभाग ने भी आपत्ति जताई है। यह मामला अब मुंबई हाई कोर्ट पहुँच चुका है, जहाँ Adani Group और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ कस्टम विभाग भी अपनी बात रख रहा है।
ड्यूटी-फ्री संचालन पर नियम-कायदे
इस कानूनी जंग का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या एयरपोर्ट के ड्यूटी-फ्री ज़ोन को टैक्स-फ्री होने के कारण राष्ट्रीय उत्पाद सुरक्षा नियमों से छूट मिल जाती है। Adani Group का तर्क है कि ये दुकानें घरेलू नियमों के दायरे से बाहर हैं, क्योंकि उत्पाद भारत के बाहर इस्तेमाल के लिए हैं।
हालांकि, कस्टम विभाग ने अपने ताज़ा हलफनामे में साफ कर दिया है कि टैक्स के लिहाज़ से कस्टम सीमा से बाहर माने जाने का मतलब यह नहीं है कि वे नियमों के पालन से आज़ाद हैं। विभाग ने कंपनी के इस बचाव को कि ये सामान अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िट के लिए हैं, 'अमान्य' करार दिया है।
एयरपोर्ट रिटेल और विस्तार पर असर
Adani Group भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का एक बड़ा खिलाड़ी है और देश भर में आठ एयरपोर्ट चलाता है। कंपनी अपने एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में $11 बिलियन के निवेश के साथ बड़े विस्तार की योजना भी बना रही है।
हालांकि, विवादित निकोटीन पाउच की बिक्री, जो अगस्त से अब तक $35,000 से ज़्यादा की है, कंपनी के कुल रेवेन्यू के मुकाबले काफी कम है। लेकिन यह कानूनी लड़ाई कंपनी के रिटेल और कमर्शियल ऑपरेशंस पर नियामक जांच का दायरा बढ़ा सकती है।
व्यापक नियामक परिदृश्य
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निकोटीन पाउच की लोकप्रियता बढ़ी है और प्रमुख ब्रांड्स की बिक्री में ज़बरदस्त ग्रोथ देखी गई है। लेकिन भारत में, इन उत्पादों पर सख्त निगरानी है। स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही इन्हें अवैध करार दे चुका है।
यह जारी कोर्ट विवाद, अत्यधिक रेगुलेटेड भारतीय बाज़ार में नए प्रकार के निकोटीन उत्पादों को पेश करने की चुनौतियों को उजागर करता है। यह मामला यह तय कर सकता है कि एयरपोर्ट ड्यूटी-फ्री ज़ोन में उपभोक्ता वस्तुओं को कैसे रेगुलेट किया जाएगा, जो अक्सर टैक्स और व्यापार के लिए अलग वातावरण माने जाते हैं।
मुंबई हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई, 2026 को होनी है। निवेशक और स्टेकहोल्डर्स इस नतीजे पर नज़र रखेंगे कि क्या कोर्ट अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्रों में बेची जाने वाली वस्तुओं पर सख्त नियामक व्यवस्था लागू करता है, क्योंकि इसका असर पूरे देश के ड्यूटी-फ्री रिटेलर्स के प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेशनल अनुपालन पर पड़ सकता है।
