AITC नेता Abhishek Banerjee ने Parliamentary Standing Committee on Chemicals and Fertilisers की चेयरपर्सन के तौर पर Kakoli Ghosh Dastidar की नियुक्ति को औपचारिक रूप से चुनौती दी है। मामला डिस्क्वालिफिकेशन (disqualification) याचिकाओं से जुड़ा है, जो पॉलिसी फ्रेमवर्क पर असर डाल सकता है।
नियुक्ति पर क्यों है विवाद?
AITC नेता Abhishek Banerjee ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को पत्र लिखकर Kakoli Ghosh Dastidar की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। यह विवाद तब बढ़ा है जब लोकसभा में स्टैंडिंग कमेटियों का पुनर्गठन (reconstitution) किया गया है। विवाद के केंद्र में 20 बागी सांसद हैं, जिनमें Dastidar भी शामिल हैं, जिन्होंने Nationalist Citizens Party of India (NCPI) में विलय का दावा किया है। AITC ने इन सदस्यों के खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन की याचिकाएं दायर कर रखी हैं।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए संसदीय समितियों की लीडरशिप बहुत मायने रखती है। ये कमेटियां ड्राफ्ट लेजिस्लेशन (draft legislation) की समीक्षा करती हैं और सरकारी मंत्रालयों के काम पर नजर रखती हैं। 'Chemicals and Fertilisers' कमेटी उन पॉलिसीज पर निगरानी रखती है जो सीधे केमिकल और फर्टिलाइजर कंपनियों को प्रभावित करती हैं। इस तरह के राजनीतिक विवादों से सब्सिडी और रेगुलेटरी दिशा-निर्देशों के फैसलों में देरी या अनिश्चितता की संभावना बनी रहती है।
कमेटियों में और क्या बदलाव हुए?
इस फेरबदल में अन्य बड़े बदलाव भी हुए हैं, जैसे कि BJP सांसद Sudhanshu Trivedi ने Dola Sen की जगह कॉमर्स कमेटी के चेयरपर्सन का पद संभाला है। अब बाजार और निवेशकों की नजरें लोकसभा स्पीकर के ऑफिस से आने वाले आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं, क्योंकि यह आने वाले संसदीय सत्रों में लेजिस्लेटिव एजेंडे को तय करेगा।
