Abakkus Mutual Fund के CEO Vaibhav Chugh ने निवेशकों को सलाह दी है कि लिक्विडिटी से चलने वाली तेज़ी के बजाय कंपनी की कमाई और क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला और डिफेंस जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में सावधानी बरतने को कहा है, जहाँ एक्ज़िक्यूशन का जोखिम बना हुआ है।
Abakkus Mutual Fund के CEO, Vaibhav Chugh ने निवेशकों को आगाह किया है कि भले ही लिक्विडिटी (Liquidity) अल्पावधि में कीमतों को बढ़ा सकती है, लेकिन लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए मजबूत बिजनेस फंडामेंटल (Business Fundamentals) का होना ज़रूरी है। हालिया एक कमेंट्री में, उन्होंने बताया कि मौजूदा मार्केट का माहौल बदल रहा है, इसलिए सिर्फ मोमेंटम (Momentum) पर ध्यान देने के बजाय सस्टेनेबल अर्निंग ग्रोथ (Sustainable Earnings Growth), कैश फ्लो (Cash Flow) और कंपनियों की क्वालिटी पर सख्ती से फोकस करना होगा।
बिजनेस क्वालिटी पर फोकस
Abakkus Mutual Fund, जो 'MEETS' नामक एक खास रिसर्च फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करता है—जिसमें मैनेजमेंट (Management), अर्निंग्स (Earnings), इवेंट्स (Events), ट्रेंड्स (Trends) और स्ट्रक्चरल कंसीडरेशन्स (Structural Considerations) शामिल हैं—वो बॉटम-अप (Bottom-up) तरीके से स्टॉक चुनने पर ज़ोर देता है। Chugh के मुताबिक, यह तरीका मौजूदा मार्केट में काफी प्रासंगिक है, जहाँ मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) सेगमेंट लिक्विडिटी से ज़्यादा प्रभावित लग रहे हैं, बजाय कि वास्तविक फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि उन कंपनियों के लिए ज़्यादा कीमत चुकाने का जोखिम बढ़ जाता है, अगर वे ध्यान से यह विश्लेषण न करें कि ग्रोथ की उम्मीदें असली प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) और ऑपरेशनल कैश फ्लो (Operational Cash Flow) द्वारा समर्थित हैं या नहीं।
स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स का उदय
Chugh ने स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (Specialized Investment Funds - SIFs) के बढ़ते महत्व की ओर भी इशारा किया। यह प्रोडक्ट कैटेगरी इसलिए लोकप्रिय हो रही है क्योंकि यह पारंपरिक म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज़ (Portfolio Management Services - PMS) के बीच एक अच्छा संतुलन प्रदान करती है। SIFs निवेशकों को हाई-एंड पोर्टफोलियो सर्विसेज़ की तुलना में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) और व्यापक पहुँच प्रदान करते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी नोट किया कि इन फंड्स की सफलता मुख्य रूप से डिसिप्लिन्ड रिस्क मैनेजमेंट (Disciplined Risk Management) और एक कंसिस्टेंट इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी (Investment Philosophy) पर निर्भर करती है, जो सिर्फ एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को बढ़ाने के बजाय विभिन्न मार्केट साइकल्स (Market Cycles) में टिक सके।
हाई-ग्रोथ थीम्स में सावधानी
हालांकि डिफेंस (Defense), पावर (Power), इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और लोकलाइज़ेशन (Localization) जैसे स्ट्रक्चरल थीम्स (Structural Themes) मौजूदा इकोनॉमिक साइकिल के असली ड्राइवर हैं, Chugh ने निवेशकों को सेलेक्टिव (Selective) रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) सेक्टर्स के कुछ हिस्सों में पहले से ही काफी ज़्यादा फ्यूचर ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे गलती की गुंजाइश बहुत कम बचती है। निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चीज़ कंपनियों की एक्ज़िक्यूशन क्षमता (Execution Capacity) है। बड़े ऑर्डर बुक (Order Book) होना एक बात है, लेकिन उन ऑर्डर्स को समय पर और लाभकारी मार्जिन पर पूरा करने की क्षमता एक अलग चुनौती है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि इन सेक्टर्स की कंपनियाँ कॉस्ट ओवररन्स (Cost Overruns) या ऑपरेशनल डिले (Operational Delays) का सामना किए बिना अपने बड़े ऑर्डर बुक्स को वास्तविक रेवेन्यू (Revenue) और प्रॉफिट में बदल पाती हैं या नहीं।
जैसे-जैसे मार्केट परिपक्व (Mature) हो रहा है, मुख्य बात यह है कि रिगरस रिसर्च (Rigorous Research) की आवश्यकता है। निवेशकों को व्यापक मार्केट इंडेक्स (Market Indices) से परे जाकर व्यक्तिगत कंपनी मेट्रिक्स (Company Metrics) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि जो कंपनियाँ ग्रोथ को बनाए रख सकती हैं और जो केवल मार्केट लिक्विडिटी पर निर्भर हैं, उनके बीच का अंतर आने वाली तिमाहियों में काफी बढ़ सकता है।
