आई केयर चेन ASG Hospitals में एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। कंपनी की माइनॉरिटी शेयरहोल्डर डॉ. शिल्पी गैंग ने को-फाउंडर डॉ. अरुण सिंघवी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में याचिका दायर की है। उन पर **₹450 करोड़** की एक प्रस्तावित फाइनेंसिंग डील को लेकर कुप्रबंधन (Mismanagement) और अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
Detailed Coverage
शेयरहोल्डर एग्रीमेंट पर टकराव
डॉ. शिल्पी गैंग ने NCLT में दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कंपनी अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) में बदलाव करके इस ₹450 करोड़ की फाइनेंसिंग डील को आगे बढ़ाना चाहती है। उनका कहना है कि यह बदलाव मौजूदा शेयरहोल्डर एग्रीमेंट का सीधा उल्लंघन होगा। उन्होंने कंपनी अधिनियम की धारा 241 और 242 के तहत यह याचिका दायर की है, जो खासतौर पर उत्पीड़न और कुप्रबंधन के मामलों को देखती हैं। डॉ. गैंग का कहना है कि यह बदलाव माइनॉरिटी शेयरहोल्डर के तौर पर उनके अधिकारों को कमजोर करेंगे।
कंपनी की ग्रोथ और बड़े निवेशक
ASG Hospitals की शुरुआत साल 2005 में जोधपुर में हुई थी और अब यह देश भर के 95 शहरों में करीब 180 सेंटर्स के बड़े नेटवर्क में बदल गई है। कंपनी की ग्रोथ में प्राइवेट इक्विटी (PE) का बड़ा हाथ रहा है। साल 2022 में, जनरल अटलांटिक (General Atlantic), केदारा कैपिटल (Kedaara Capital) और स्काई इम्पैक्ट (Sky Impact) जैसे बड़े निवेशकों के एक कंसोर्टियम ने कंपनी में करीब ₹1,500 करोड़ का निवेश किया था। ये संस्थागत निवेशक वर्तमान में कंपनी में लगभग 70% हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में, इस बड़े रीस्ट्रक्चरिंग में इन निवेशकों की भूमिका मामले को और जटिल बनाती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
इस मामले में अब सभी की निगाहें NCLT के फैसले पर टिकी होंगी। यह देखना अहम होगा कि ट्रिब्यूनल डॉ. गैंग की याचिका पर क्या रुख अपनाता है। इस केस का नतीजा यह तय करेगा कि ASG Hospitals अपनी ₹450 करोड़ की फाइनेंसिंग डील को कैसे आगे बढ़ाएगी। निवेशकों के लिए यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद कंपनी के विस्तार योजनाओं, लीडरशिप की स्थिरता और संस्थागत साझेदारों के साथ उसके रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है।
