Andhra Pradesh सरकार ने एक नई पॉलिसी को मंजूरी दी है, जिसके तहत ग्लोबल और प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की जरूरत को घटाकर सिर्फ **10 एकड़** कर दिया गया है। राज्य का मकसद छात्रों का पलायन रोकना और इंडस्ट्री की मांग के अनुसार स्किल्स डेवलप करना है।
Andhra Pradesh सरकार ने उच्च शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। अगस्त 2026 में हुए विधायी सुधारों के बाद, अब नई पॉलिसी के तहत विदेशी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के लिए राज्य में कैंपस खोलना बेहद आसान हो गया है।
क्या बदले हैं नियम?
सबसे बड़ा बदलाव जमीन की अनिवार्यता में किया गया है। अब विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, तिरुपति और CRDA जैसे प्रमुख शहरी इलाकों में यूनिवर्सिटी खोलने के लिए केवल 10 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। अन्य जगहों के लिए यह सीमा 15 एकड़ तय की गई है, जो पहले 50 एकड़ हुआ करती थी। इस कदम से उन इलाकों में भी निवेश आएगा जहां जमीन महंगी या कम उपलब्ध है।
ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स और फीस कंट्रोल
सरकार ने 'ब्राउनफील्ड' मॉडल को भी मंजूरी दी है, जिसके जरिए पहले से चल रहे शिक्षण संस्थानों को अब यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल सकेगा। साथ ही, पुरानी रेगुलेटरी बॉडी को हटाकर एक नई कमेटी बनाई गई है, जो फीस पर नजर रखेगी। इसका मुख्य लक्ष्य निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और इंडस्ट्री-एकेडमी के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि यह पहल निवेश और शिक्षा के विस्तार के लिए अच्छी है, लेकिन एक्सपर्ट्स शिक्षा के कमर्शियलाइजेशन को लेकर आशंकित हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई फीस-रेगुलेटरी कमेटी छात्रों के लिए पढ़ाई को किफायती कैसे बनाए रखेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कितनी तेजी से इस सिस्टम को लागू करती है और क्या वाकई दिग्गज ग्लोबल यूनिवर्सिटीज को राज्य में लाने में सफल हो पाती है या नहीं।
