AIADMK में मचा घमासान: उपचुनाव में हार के बाद टूट की कगार पर पार्टी

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
AIADMK में मचा घमासान: उपचुनाव में हार के बाद टूट की कगार पर पार्टी

उपचुनावों में करारी हार के बाद AIADMK भारी नेतृत्व संकट से जूझ रही है। चेन्नई में बागी विधायकों की बैठक से पार्टी में टूट के संकेत मिल रहे हैं, जिससे तमिलनाडु विधानसभा में इसकी स्थिति और कमजोर हो गई है।

तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। 9 अक्टूबर, 2026 को धारापुरम और मदुरंतकम में हुए उपचुनावों के नतीजों ने पार्टी की नींव हिला दी है। सोमवार, 12 अक्टूबर, 2026 को चेन्नई में असंतुष्ट विधायकों की एक बैठक हुई, जिसमें पार्टी के भविष्य को लेकर मंथन किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले ही तमिलनाडु विधानसभा में मुख्य विपक्ष का दर्जा खो चुकी है।

बगावत की असली वजह क्या है?

पार्टी के भीतर असंतोष का मुख्य कारण नेतृत्व के फैसले और संगठन पर नियंत्रण को लेकर चल रही खींचतान है। बागी विधायकों द्वारा एक अलग विधायी गुट बनाने की योजना पर चर्चा की जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो विधानसभा में पार्टी की ताकत और सिमट जाएगी, जहाँ उसे मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सरकार का सामना करने में पहले ही मुश्किलें आ रही हैं।

क्या शेयर बाजार पर होगा असर?

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि AIADMK एक राजनीतिक संगठन है, न कि कोई पब्लिक लिस्टेड कंपनी। इसके न तो शेयर बाजार में शेयर हैं और न ही कोई फाइनेंशियल फाइलिंग। हालांकि, यह खबर राज्य में नीतिगत स्थिरता और शासन को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका सीधा असर मार्केट पर नहीं पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट और आगे की राह

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के अयोग्यता संबंधी फैसलों में दखल देने से इनकार कर दिया था, जिससे सरकार फिलहाल सुरक्षित है। अब Edappadi K. Palaniswami के सामने अपनी पार्टी को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बागी विधायक औपचारिक रूप से अलग होते हैं या नेतृत्व कोई सुलह का रास्ता निकालने में कामयाब रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.