AI का जाल बिछाकर ठगी! गुजरात पुलिस ने 22,000 लोगों को चूना लगाने वाले गैंग का किया पर्दाफाश

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AI का जाल बिछाकर ठगी! गुजरात पुलिस ने 22,000 लोगों को चूना लगाने वाले गैंग का किया पर्दाफाश

गुजरात में पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर 126 फर्जी वेबसाइट बनाने वाले एक बड़े जाल को पकड़ा है. इस गैंग ने करीब 22,000 लोगों से ठगी की है, जो धार्मिक स्थलों और होटलों की बुकिंग के नाम पर फंसाए गए थे. यह मामला AI से जुड़े साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को दिखाता है.

AI का दुरुपयोग: धार्मिक स्थलों के नाम पर ऑनलाइन ठगी

गुजरात साइबर सेल ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 126 फर्जी वेबसाइटें बनाई थीं। इन वेबसाइटों को बिल्कुल असली धार्मिक स्थलों, होटलों और आश्रमों की बुकिंग साइट्स जैसा दिखाया जाता था, ताकि श्रद्धालु आसानी से झांसे में आ जाएं। इस मामले में दिल्ली के एक बी.टेक इंजीनियर विक्की गुप्ता को मास्टरमाइंड और राजस्थान के शैलेश सैनी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

11 राज्यों में फैला धोखाधड़ी का जाल

यह ठगी का रैकेट पिछले 8 महीनों से 11 राज्यों में सक्रिय था और इसने करीब 21,985 लोगों को अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने AI टूल्स का इस्तेमाल करके ऐसी वेबसाइटें तैयार कीं जो असली बुकिंग पोर्टल्स से अलग दिखना नामुमकिन था। भोले-भाले श्रद्धालुओं से ये लोग होटल बुकिंग, पूजा-पाठ और VIP दर्शन के लिए एडवांस पैसे लेते थे। जब श्रद्धालु बताई गई जगह पहुंचते थे, तो उन्हें पता चलता था कि उनकी बुकिंग का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, जिसके बाद शिकायतों का अंबार लग गया।

गुजरात से लेकर तिरुपति तक शिकार

इस धोखाधड़ी में गुजरात के प्रमुख धार्मिक स्थल जैसे सोमनाथ, द्वारका और अंबाजी के अलावा तिरुपति, शिरडी और हरिद्वार जैसे बड़े तीर्थस्थल भी शामिल थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह पैसा कहां गया और इस फर्जी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में और किन लोगों का हाथ था।

AI से बढ़ता साइबर क्राइम का खतरा

यह घटना AI के बढ़ते दुरुपयोग और साइबर क्राइम के नए तरीकों को उजागर करती है। AI टूल्स के आसान उपलब्धता के कारण, अपराधी अब कम समय और कम लागत में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी वाले प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं। इससे आम लोगों से लेकर व्यवसायों तक, सभी के लिए वित्तीय नुकसान, डेटा चोरी और विश्वासघात का खतरा बढ़ गया है।

साइबर सुरक्षा के लिहाज़ से यह एक बड़ी चेतावनी है। ऑनलाइन सेवाओं और बुकिंग के लिए हमें और भी सतर्क रहने की ज़रूरत है, साथ ही कंपनियों को भी अपनी वेबसाइटों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। पुलिस अभी भी इस मामले में डोमेन खरीदारों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.