Basel Action Network की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से बढ़ रही AI तकनीक साल 2050 तक **617 मिलियन मीट्रिक टन** ई-वेस्ट पैदा कर सकती है। इसमें सर्वर, कूलिंग सिस्टम और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, जो आने वाले समय में डेटा सेंटर ऑपरेटरों और टेक कंपनियों के लिए बड़ी रेगुलेटरी चुनौती बन सकते हैं।
कचरे का विशाल संकट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में जिस तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, वह भविष्य में एक बड़े कचरा प्रबंधन (Waste Management) संकट को जन्म दे रहा है। Basel Action Network (BAN) के विश्लेषण के मुताबिक, AI बूम के कारण रिटायर होने वाले हार्डवेयर की मात्रा साल 2050 तक 395 मिलियन से 617 मिलियन मीट्रिक टन के बीच हो सकती है। यह आंकड़ा इतना विशाल है कि इसे 23 मिलियन बड़े शिपिंग कंटेनरों में भरा जा सकता है, जो पृथ्वी का कई बार चक्कर लगाने के लिए काफी हैं।
क्या है असली खतरा?
अब तक मार्केट का फोकस सिर्फ GPU और सेंट्रल सर्वर पर था, लेकिन नई रिपोर्ट में लिक्विड कूलिंग सिस्टम, पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स और नेटवर्किंग हार्डवेयर को भी इसमें शामिल किया गया है। इन अतिरिक्त उपकरणों के कारण सालाना ई-वेस्ट का उत्पादन 8.6 मिलियन से 13.1 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है।
निवेशकों के लिए सबक (ESG रिस्क)
इन्वेस्टर्स के लिए यह रिसर्च एक बड़ा 'ऑपरेशनल और ESG रिस्क' पेश करती है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर केवल 25% ई-वेस्ट को ही रिसाइकिल किया जा रहा है। ऐसे में डेटा सेंटर ऑपरेटरों पर सर्कुलर इकोनॉमी अपनाने का दबाव बढ़ेगा। जो कंपनियां समय रहते हार्डवेयर के 'एंड-ऑफ-लाइफ' मैनेजमेंट और रिसाइक्लिंग पर ध्यान नहीं देंगी, उन्हें भविष्य में सख्त रेगुलेटरी जांच और बढ़ते अनुपालन खर्चों (Compliance Costs) का सामना करना पड़ सकता है।
नया निवेश अवसर
हालांकि यह एक चुनौती है, लेकिन औद्योगिक स्तर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रिसाइकिल करने वाली कंपनियों के लिए यह विकास का एक नया मौका है। दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Metals) को रिकवर करने की क्षमता अब कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी का अहम पैमाना बनेगी। निवेशकों को अब डेटा सेंटर स्पेस की कंपनियों के ESG डिस्क्लोजर और उनकी रिसाइक्लिंग पार्टनरशिप पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।
