पर्यटन पर टूटाThe
खजुराहो, जो अपने प्राचीन चंदेल-कालीन मंदिरों के लिए जाना जाता है, इस समय एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। गर्मी 46-47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई है, जिससे शहर की सड़कें वीरान हैं और बाजार सुनसान पड़े हैं। पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है क्योंकि चिलचिलाती धूप लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर रही है। इसका सीधा असर यहां के सामान्य जनजीवन और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ा है।
आर्थिक मार और सामुदायिक प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यवसायों का कहना है कि काम पूरी तरह से ठप हो गया है। कई व्यापारियों ने तो गर्मी के चरम घंटों के दौरान अपनी दुकानें बंद रखना ही बेहतर समझा है। उनकी मानें तो मौजूदा हालात लॉकडाउन जैसे हैं, क्योंकि बाहर निकलकर काम करना संभव नहीं है। कभी चहल-पहल से भरे रहने वाले रेस्तरां और दुकानें अब वीरान दिख रही हैं। पर्यटकों को घूमने-फिरने में भारी परेशानी हो रही है। एक पर्यटक ने बताया कि यह स्थिति COVID-19 महामारी के प्रतिबंधों की याद दिला रही है, जिसने छोटी-मोटी यात्राओं को भी मुश्किल बना दिया है।
सरकारी उपाय और मौसम विभाग की चेतावनी
इस संकट से निपटने के लिए, खजुराहो नगर परिषद ने राहत कार्य शुरू किए हैं। इसमें पीने के पानी की व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर छायादार विश्राम स्थल बनाना शामिल है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने निवासियों को दिन के दौरान बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि रेड अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बनी रहेगी। यह लंबी चेतावनी संकेत देती है कि खजुराहो के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर जारी रह सकता है।
