सरकार ने पुष्टि की है कि भारत के 3,688 संरक्षित स्मारकों में से 414 पर अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। संस्कृति मंत्रालय इस समस्या से निपटने के लिए AMASR Act, 1958 और Bhuvan Portal के ज़रिए डिजिटल बाउंड्री मैपिंग का इस्तेमाल कर रहा है।
414 स्मारकों पर अतिक्रमण का खतरा!
भारत सरकार ने खुलासा किया है कि देश के 3,688 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में से 414 पर अतिक्रमण का गंभीर संकट है। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने यह जानकारी केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हवाले से राज्यसभा में दी है। यह स्थिति देश की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने में आ रही चुनौतियों को दर्शाती है।
ASI की भूमिका और कानूनी कार्रवाई
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इन सभी 3,688 स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। हालांकि, ये स्थल कानूनी रूप से संरक्षित होने के बावजूद अनधिकृत निर्माण और ज़मीन पर कब्जे से अछूते नहीं हैं। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 का सख्ती से पालन कर रही है। सरकार का कहना है कि अतिक्रमण की पहचान होते ही कार्रवाई की जाती है। इसमें अक्सर स्थानीय राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है ताकि ज़मीनी रिकॉर्ड की जांच हो सके और संरक्षित क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सके।
डिजिटल तकनीक से सीमाओं की सुरक्षा
भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए सरकार डिजिटल तकनीक पर भी काफी निर्भर है। ASI ने सभी संरक्षित स्मारकों की सीमाओं की जियो-रेफरेंसिंग और डिजिटाइजेशन का काम पूरा कर लिया है। इस डेटा को Bhuvan Portal पर अपलोड किया गया है, जो एक राष्ट्रीय मंच है। इससे निगरानी में सुधार होगा और आधिकारिक सीमा जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच आसान होगी। सीमाओं के इस डिजिटलीकरण से विवादों को कम करने और संरक्षण कानूनों के प्रवर्तन में सुधार लाने का लक्ष्य है।
यह अपडेट सीधे तौर पर वित्तीय बाज़ार से जुड़ा नहीं है, लेकिन यह सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन में आ रही दिक्कतों को दिखाता है। हितधारकों को अब सीमांकन की प्रगति और ASI द्वारा अतिक्रमण हटाने तथा नए अतिक्रमणों को रोकने में AMASR Act के प्रभावी उपयोग पर नज़र रखनी होगी।
