foundit के एक नए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है! एक-तिहाई से ज़्यादा कर्मचारी अपनी परफॉरमेंस रिव्यु (Performance Review) के दौरान अपने मैनेजर्स से सपोर्ट न मिलने की बात कह रहे हैं। सैलरी हाइक (Salary Hike) और उम्मीदों के बीच बड़ा गैप भी लोगों को जॉब बदलने के लिए मजबूर कर रहा है।
Detailed Coverage
Appraisals में Manager का साथ नहीं, 32% कर्मचारी अकेले
रोजगार प्लेटफॉर्म foundit के हालिया सर्वे में कॉर्पोरेट जगत के एक बड़े मुद्दे को उजागर किया गया है। सर्वे के अनुसार, 32% कर्मचारियों ने बताया कि हालिया Appraisals के दौरान उन्हें अपने रिपोर्टिंग मैनेजर्स (Reporting Managers) से कोई खास सपोर्ट नहीं मिला। इसका मतलब है कि कई प्रोफेशनल्स को मूल्यांकन प्रक्रिया से अकेले ही गुजरना पड़ा, जिसका सीधा असर उनके मूड और कंपनी के साथ लंबे जुड़ाव पर पड़ सकता है।
सैलरी का फासला और बढ़ती जॉब स्विचिंग
सर्वे ने कंपनियों द्वारा दी जा रही सैलरी हाइक (Salary Hike) और कर्मचारियों की उम्मीदों के बीच गहरी खाई को भी दिखाया है। सर्वे में शामिल 19% लोगों को 6% से 10% तक का इंक्रीमेंट मिला। वहीं, जब दूसरी कंपनी में जाने की बात आती है, तो 70% प्रोफेशनल्स कम से कम 21% की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह बड़ा अंतर लोगों को बेहतर सैलरी पैकेज की तलाश में दूसरी जगह जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
कंपनियों के लिए Retention का बड़ा खतरा
Appraisals में इस कमी का असर कर्मचारियों की जॉब स्विचिंग की इच्छाओं में भी दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक, 52% लोग सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, जबकि 34% लोग ऑफर्स के लिए खुले हैं। ऐसे में, कंपनियों को अपने कर्मचारियों को बनाए रखने (Retention) में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। जब कर्मचारियों को लगता है कि उनकी कंपनी उनके करियर ग्रोथ (Career Growth) या आर्थिक लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रही है, तो वे अक्सर करियर में आगे बढ़ने को ज़्यादा अहमियत देते हैं।
सिर्फ सैलरी नहीं, ग्रोथ भी ज़रूरी
नौकरी बदलने के पीछे सैलरी सबसे बड़ा कारण है, जिसे 40% लोगों ने बताया। लेकिन यह इकलौता फैक्टर नहीं है। प्रोफेशनल ग्रोथ (Professional Growth) और नई चीजें सीखने की चाहत भी 36% लोगों के लिए मायने रखती है। इसका मतलब है कि जिन कंपनियों में कर्मचारियों के जाने की दर (Attrition Rate) ज़्यादा है, उन्हें सिर्फ सैलरी बढ़ाने के बजाय करियर पाथ (Career Path) और मैनेजमेंट-एम्प्लॉई के बीच बेहतर तालमेल जैसी चीजों पर भी ध्यान देना होगा। ज़्यादा Attrition Rate से कंपनियों को हायरिंग, ट्रेनिंग और उत्पादकता (Productivity) के नुकसान के कारण अतिरिक्त लागतें झेलनी पड़ सकती हैं, जिसका असर उनके मार्जिन पर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि कंपनियां इस कम्युनिकेशन गैप को पाटने में कितनी सफल होती हैं।
