Zerodha Fund House ने अपना नया Arbitrage Fund लॉन्च किया है, जिसका न्यू फंड ऑफर (NFO) 12 से 14 अगस्त, 2026 तक खुला रहेगा। इस फंड में ₹5,000 के न्यूनतम निवेश की ज़रूरत है और इसका मकसद इक्विटी व डेरिवेटिव्स मार्केट के प्राइस डिफरेंस का फायदा उठाकर कम वोलेटिलिटी (volatility) वाला, टैक्स-एफिशिएंट (tax-efficient) विकल्प देना है, खासकर छोटे समय के सरप्लस कैश को पार्क करने के लिए।
Zerodha Fund House का Arbitrage Fund लॉन्च
Zerodha Fund House ने आज, 12 अगस्त 2026 को, अपने नए Arbitrage Fund के साथ आर्बिट्राज स्पेस में एंट्री की है। यह ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम अपने न्यू फंड ऑफर (NFO) के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध है, जो 14 अगस्त 2026 को बंद हो जाएगा। निवेशक ₹5,000 की न्यूनतम राशि से निवेश शुरू कर सकते हैं। इस फंड को Kedarnath Mirajkar मैनेज कर रहे हैं और इसका बेंचमार्क NIFTY 50 Arbitrage TRI है।
निवेश की रणनीति और लक्ष्य
फंड का मुख्य उद्देश्य कैश मार्केट और फ्यूचर्स मार्केट में एक ही स्टॉक के लिए अस्थायी मूल्य अंतर (price differences) का फायदा उठाकर रिटर्न जेनरेट करना है। कैश मार्केट में स्टॉक खरीदकर और साथ ही उसके फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट को बेचकर, फंड का लक्ष्य यह लॉक-इन करना है कि ब्रॉडर स्टॉक मार्केट ऊपर जाए या नीचे, इससे मुनाफ़ा होगा। इक्विटी-ओरिएंटेड फंड के तौर पर अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए, स्कीम अपनी पोर्टफोलियो का कम से कम 65% इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में निवेश करने की योजना बना रही है। जब आर्बिट्राज के अवसर सीमित होते हैं, तो फंड लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए बाकी एसेट्स को शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगा सकता है।
टैक्सेशन और एग्जिट (Exit) के नियम
निवेशक अक्सर आर्बिट्राज फंड पर विचार करने के मुख्य कारणों में से एक उनका टैक्स ट्रीटमेंट है। चूंकि फंड इक्विटी में न्यूनतम 65% एक्सपोजर बनाए रखता है, इसलिए इसे इक्विटी म्यूचुअल फंड के समान टैक्स लगता है। यह उच्च टैक्स ब्रैकेट में निवेशकों के लिए अन्य शॉर्ट-टर्म सेविंग्स टूल्स की तुलना में ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है। 12 महीने से ज़्यादा होल्डिंग पीरियड पर होने वाले मुनाफे पर, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर प्रति फाइनेंशियल ईयर ₹1.25 लाख से ज़्यादा की राशि पर 12.5% टैक्स लगता है। 12 महीने से कम होल्डिंग पीरियड पर, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 20% टैक्स लगता है।
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि जहां इस फंड का लक्ष्य प्योर इक्विटी फंड की तुलना में कम वोलेटिलिटी है, वहीं यह जोखिम-मुक्त नहीं है। रिटर्न्स फंड मैनेजर की मुनाफे वाले स्प्रेड्स की पहचान करने की प्रभावशीलता और मार्केट में ऐसे अवसरों की उपलब्धता के आधार पर बदल सकते हैं। इसके अलावा, अलॉटमेंट डेट के 30 दिनों के भीतर यूनिट्स को रिडीम (redeem) या स्विच (switch) करने पर 0.25% का एग्जिट लोड है। इस फंड को ट्रैक करने वाले निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फंड मैनेजर मार्केट लिक्विडिटी को कैसे नेविगेट करता है और जैसे-जैसे फंड का एसेट बेस बढ़ता है, क्या फंड लगातार प्राइस स्प्रेड्स को कैप्चर करने में कामयाब होता है।
