भारतीय महिला निवेशकों के निवेश का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। साल **2020** में इक्विटी म्यूचुअल फंड में उनका निवेश **40%** था, जो अब बढ़कर **65%** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ICRA Analytics की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे शहरों से आ रही यह भारी भागीदारी भारतीय रिटेल निवेशकों के व्यवहार में बड़े बदलाव का संकेत है।
पिछले पांच वर्षों में महिला निवेशकों के पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव देखा गया है। मार्च 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं ने अपनी पूंजी का 65% हिस्सा इक्विटी स्कीमों में लगाया है, जो 2020 में सिर्फ 40% था। दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी पूरी इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ (27% से 45%) के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज है।
छोटे शहरों का दम (B30 Growth)
यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। 'बियॉन्ड टॉप 30' (B30) यानी छोटे शहरों और कस्बों की महिला निवेशकों ने इक्विटी स्कीमों में 65.9% तक निवेश किया है, जबकि टॉप 30 शहरों का आंकड़ा 39.8% रहा। यह साबित करता है कि अब दूर-दराज के इलाकों से भी रिटेल पैसा मार्केट में आ रहा है।
आंकड़ों में ग्रोथ
इक्विटी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जो अगस्त 2021 में ₹12.3 लाख करोड़ था, वह अगस्त 2026 तक बढ़कर ₹39.2 लाख करोड़ पहुंच गया है। इक्विटी फोलियो की संख्या भी बढ़कर 18.9 करोड़ हो गई है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक अपने एसआईपी (SIP) के प्रति अनुशासित बने हुए हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत है।
नई चुनौतियां
हालांकि, छोटे शहरों से आ रहा यह पैसा बाजार के रिस्क के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। पारंपरिक बचत के मुकाबले इक्विटी निवेश में बाजार के साइकल (Cycles) का सीधा असर पड़ता है। आने वाले समय में बाजार में अस्थिरता के दौरान यह नया इन्वेस्टर बेस कैसे व्यवहार करता है, यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की भविष्य की ग्रोथ तय करेगा।
