साल 2026 के मध्य तक Nifty 500 TRI में किए गए कई 2-वर्षीय SIP का रिटर्न लगभग शून्य रहा है। हालांकि, ऐतिहासिक डेटा बताता है कि यह केवल बाजार का अल्पकालिक शोर है और धैर्य रखने में ही समझदारी है।
जून 2026 तक भारतीय निवेशकों ने गौर किया है कि उनके 24 महीनों के SIP का रिटर्न फ्लैट या शून्य के करीब है। Nifty 500 Total Return Index (TRI) के प्रदर्शन के चलते निवेशकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उनकी रणनीति फेल हो रही है। लेकिन फाइनेंशियल हिस्ट्री गवाह है कि 2 साल का समय लंबी अवधि की सफलता का सही पैमाना नहीं है।\n\n### रिटर्न का गणित और भ्रम\nशून्य रिटर्न की धारणा अक्सर एक नए पोर्टफोलियो में रिटर्न की गणना के तरीके से आती है। SIP की शुरुआत में शुरुआती किस्तों को कंपाउंडिंग का लाभ मिलने में समय लगता है। इसके अलावा, SIP रिटर्न मापने का टूल XIRR हालिया कैश फ्लो के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। यदि बाजार में उस विशेष अवधि में कोई बड़ी रैली नहीं आई है, तो पोर्टफोलियो का रिटर्न कमजोर दिख सकता है, भले ही फंडामेंटल्स मजबूत हों।\n\n### क्यों जरूरी है बाजार की सुस्ती?\nअनुभवी निवेशक बाजार की गिरावट या सुस्ती को नुकसान नहीं, बल्कि अवसर मानते हैं। इसे 'रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee-Cost Averaging) कहते हैं। जब बाजार स्थिर या गिर रहा होता है, तो आपकी फिक्स्ड मंथली किस्त में म्यूचुअल फंड की अधिक यूनिट्स खरीदी जाती हैं क्योंकि NAV कम होती है। ये यूनिट्स तब मल्टीप्लायर का काम करती हैं जब बाजार रिकवर करता है।\n\n### ऐतिहासिक ट्रेंड्स और रिकवरी\nपिछले 2 दशकों के बाजार चक्रों का डेटा बताता है कि 2 साल की अवधि में शून्य या नेगेटिव रिटर्न कभी भी स्थायी नहीं रहे हैं। जिन मामलों में 2 साल का SIP रिटर्न 5% या उससे कम रहा, वहां 5 साल की अवधि में डबल डिजिट रिटर्न की संभावना काफी अधिक देखी गई है। जैसे-जैसे निवेश का समय 7 से 10 साल तक बढ़ता है, बाजार की अस्थिरता कम हो जाती है और वेल्थ क्रिएशन की संभावना बढ़ जाती है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम\nसबसे बड़ा जोखिम व्यवहार संबंधी (Behavioral) है। फ्लैट रिटर्न देखकर SIP बंद करना या निवेश निकाल लेना कंपाउंडिंग की प्रक्रिया को हमेशा के लिए खत्म कर देता है। इसके अलावा, लिक्विडिटी मिसमैच से बचें—यदि आपका गोल 1-2 साल के भीतर है, तो इक्विटी में जोखिम अधिक रहता है। हमेशा अपने निवेश के लक्ष्य और समय सीमा पर ध्यान दें, न कि रोज के NAV फ्लक्चुएशन पर।
